आईपीटीवी - इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन
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सामान्यत: यूजर आईपीटीवी की सहायता से एक तीर से तीन निशाने लगा सकता है। आईपीटीवी द्वारा वह न सिर्फ कभी भी अपना मनचाहा टीवी कार्यक्रम देख सकता है, बल्कि वेब एक्सेस और वीओआईपी जैसी सुविधाओं का भी लाभ उठा सकते है, जिसके लिए 'ट्रिपल प्ले' एक उपयुक्त शब्द है।
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'आईपीटीवी' का इतिहास -
1994 में एबीसी का वर्ल्ड न्यूज ऐसा पहला टीवी कार्यक्रम था, जो कि सीयू-सीमी वीडियोकांफ्रेंसिंग की सहायता से इंटरनेट पर भी प्रसारित किया गया था, मगर 1995 में जूडिथ ऐस्ट्रिन और बिल कैरिसो ने एक सॉफ्टवेयर के रूप में इस शब्द को पहचान दी। 10 जनवरी, 1998 को ऑडियोनेट नामक एक इंटरनेट कंपनी ने लाइव वेबकास्ट प्रारंभ किया।
वर्तमान में तकनीकी के विकास को देखते हुए आईपीटीवी का भविष्य काफी सुनहरा माना जा रहा है। उम्मीद है कि 2005 तक पूरे विश्व में आईपीटीवी उपभोक्ताओं की सँख्या 200 मिलियन तक हो जानी चाहिए।
'आईपीटीवी' का व्यापक स्वरूप-
'आईपीटीवी' की ब्रॉडकास्ट सेवाओं का मूल रूप से दो स्वरूपों के अंतर्गत उपयोग किया जा सकता है- निःशुल्क व शुल्क पर आधारित सेवाएँ। एक सर्वेक्षण के अनुसार 2006 तक विश्व में 1,300 आईपीटीवी चैनल्स प्रसारित हो चुके हैं, जिनमें वर्तमान में काफी व्यापक पैमाने पर वृद्धि हुई है।
इनके लिए केवल इंटरनेट कनेक्शन और कोई पर्सनल कम्प्युटर, एचडीटीवी कनेक्टेड कम्प्युटर या फिर 3जी मोबाइल फोन की आवश्यकता है। वर्तमान में कैलिफोर्निया की यूटीस्टारकॉम इंक तथा टेनेसी की वर्ले कंसल्टिंग नामक दो कंपनियाँ आईपीटीवी की सेवाओं के लिए नेटवर्किग इन्फ्रास्ट्रकचर की सुविधा प्रदान कर रही हैं।
प्रोटोकॉल्स-
आईपीटीवी मूल रूप से टीवी ब्रॉडकास्टिंग के साथ-साथ वीओडी यानी वॉयल ऑन डिमांड की सुविधा प्रदान करते है। लाइव टीवी ब्रॉडकास्टिंग के लिए आईजीएमपी वर्जन 2 की सहायती से चैनलों को मल्टीकास्ट किया जा सकेगा। वहीं वीओडी मूल रूप से रियल टाइम स्ट्रीमिंग प्रोटोकॉल पर आधारित है।

