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युद्ध में टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को ईरान क्यों बना रहा है सॉफ्ट टारगेट और इसके पीछे क्या है रणनीति

Updated: शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 (17:10 IST)
ईरान के ड्रोन हमलों ने युद्ध के स्वरूप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात में Amazon Web Services (AWS) के दो डेटा सेंटर्स को निशाना बनाया, जबकि बहरीन में एक अन्य कमर्शियल डेटा सेंटर भी हमले की चपेट में आया। यह पहली बार है जब किसी देश ने युद्ध के दौरान जानबूझकर व्यावसायिक डेटा सेंटर्स को निशाना बनाया है।
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आखिर डेटा सेंटर्स को निशाना बनाने के पीछे ईरान की रणनीति क्या है। अब तक डेटा सेंटर्स पर साइबर हमले और जासूसी होती रही है, जैसे 2024 में यूक्रेनी हैकर्स द्वारा रूसी सैन्य डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचाना, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में हुए ये हमले फिजिकल थे, जिनमें ड्रोन ने सीधे इमारतों को क्षतिग्रस्त किया। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि यह पूरी तरह से युद्ध के स्वरूप में बदलाव का संकेत नहीं है, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि डेटा सेंटर्स अब 'सॉफ्ट टारगेट' बन चुके हैं।
 
इनकी संरचना बड़ी और अपेक्षाकृत कमजोर होती है, साथ ही इनमें विशेष एयर डिफेंस नहीं होता, जिससे ये आसानी से निशाने पर आ सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विस्तार ने डेटा सेंटर्स को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। अमेरिकी सेना हमलों और ऑपरेशंस में AI सिस्टम्स का इस्तेमाल कर रही है। इसमें Claude जैसे टूल्स शामिल हैं।
 
इन AI सिस्टम्स का संचालन क्लाउड पर होता है, जो अक्सर AWS जैसे कमर्शियल डेटा सेंटर्स पर निर्भर होता है। यही कारण है कि इन इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाकर सैन्य और आर्थिक गतिविधियों को बाधित किया जा सकता है। हालांकि हजारों मिसाइल और ड्रोन हमलों में डेटा सेंटर्स पर हमले बहुत कम थे, लेकिन AI और क्लाउड तकनीक की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भविष्य में ऐसे हमलों की संभावना बढ़ सकती है।

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक इन हमलों के पीछे सैन्य कारणों के अलावा राजनीतिक संदेश भी हो सकता है। यूएई और अमेरिका के करीबी संबंधों को देखते हुए, ईरान ने इन हमलों के जरिए वैश्विक अर्थव्यवस्था और अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश की हो सकती है। Edited by : Sudhir Sharma
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