जूलियन असांजे की मुश्किलें बढ़ीं, इक्वाडोर की अदालत ने रद्द की नागरिकता

Last Updated: बुधवार, 28 जुलाई 2021 (10:16 IST)
मुख्य बिंदु
  • जूलियन असांजे मुश्किलें बढ़ीं
  • अदालत ने रद्द की नागरिकता
  • विकीलीक्स के संस्थापक हैं असांजे
क्वीटो। इक्वाडोर ने विकीलीक्स के संस्थापक और इस समय ब्रिटेन की जेल में बंद जूलियन असांजे की कर दी है। इक्वाडोर की न्याय प्रणाली ने दक्षिण अमेरिकी देश के विदेश मंत्रालय द्वारा दायर एक दावे के जवाब में एक पत्र में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक असांजे को उनकी नागरिकता रद्द किए जाने के बारे में आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया।

किसी विदेशी को देश में निश्चित समय तक रहने के बाद मिली नागरिकता को तब हानिकारक माना जाता है, जब इसे प्रासंगिक तथ्यों को छिपाकर, झूठे दस्तावेजों या धोखाधड़ी के आधार पर दिया गया हो। इक्वाडोर के अधिकारियों ने कहा कि असांजे को दी नागरिकता के संबंध में कई विसंगतियां, अलग-अलग हस्ताक्षर, दस्तावेजों से संभावित छेड़छाड़, शुल्क का भुगतान नहीं करना और अन्य समस्याएं पाई गई हैं।


असांजे के वकील कार्लोस पोवेदा ने 'द एसोसिएटेड प्रेस' को बताया कि फैसला उचित प्रक्रिया के बिना किया गया और असांजे को मामले में पेश होने की अनुमति नहीं दी गई। पोवेदा ने कहा कि वह निर्णय के स्पष्टीकरण के लिए अपील दायर करेंगे। पावेदा ने कहा कि नागरिकता की महत्ता से अधिक यह अधिकारों का सम्मान करने और नागरिकता वापस लेने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करने का मामला है।
असांजे को जनवरी 2018 में इक्वाडोर की नागरिकता प्राप्त हुई थी। इक्वाडोर के विदेश मंत्रालय ने एपी को बताया कि अदालत ने पिछली सरकार के समय के मामले और उसी सरकार द्वारा उठाए गए मामले में स्वतंत्र रूप से काम किया और उचित प्रक्रिया का पालन किया।

50 वर्षीय असांजे लंदन की उच्च सुरक्षा वाली बेलमर्श जेल में हैं। उन्हें अप्रैल 2019 में गिरफ्तार किया गया था। असांजे ने इक्वाडोर के लंदन दूतावास में 7 साल बिताए, जहां से वह 2012 में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना करने के लिए स्वीडन में प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए भाग गए थे। स्वीडन ने लंबा समय बीत जाने के कारण नवंबर 2019 में यौन अपराधों की जांच बंद कर दी थी।
अमेरिकी अभियोजकों ने लीक सैन्य और राजनयिक दस्तावेजों के विकीलीक्स द्वारा प्रकाशन को लेकर असांजे पर जासूसी के मामले में 17 आरोप और कंप्यूटर के दुरुपयोग के मामले में एक आरोप लगाया था। इन आरोपों के सही साबित होने पर अधिकतम 175 साल की जेल की सजा हो सकती है।(भाषा)



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