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Most educated person in india: डॉक्टर, IPS, IAS के साथ 20 से ज्यादा डिग्रियां, जानिए कौन हैं भारत के सबसे पढ़े-लिखे व्यक्ति

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 2 सितम्बर 2025 (17:46 IST)
Most educated person in india: जब बात ज्ञान की होती है, तो भारत का नाम सबसे आगे आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसा व्यक्ति भी हुआ है, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसकी बराबरी करना लगभग असंभव है? हम बात कर रहे हैं डॉ. श्रीकांत जिचकर  की, जिन्हें आधिकारिक तौर पर भारत का सबसे पढ़ा-लिखा व्यक्ति माना जाता है। उनका जीवन ज्ञान के प्रति एक अथाह जुनून का प्रमाण है।

20 से ज्यादा डिग्रियां: नागपुर में 1954 में जन्मे डॉ. श्रीकांत जिचकर  ने अपनी 20 से अधिक डिग्रियों के साथ हर किसी को हैरान कर दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए 10 विषयों में एम.ए. की उपाधि हासिल की और हर विषय में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उनकी लगन और ज्ञान की प्यास का नतीजा था। उनकी कुछ प्रमुख डिग्रियां इस प्रकार हैं:
• एमबीबीएस और एमडी (चिकित्सा विज्ञान)
• एलएलबी और एलएलएम (कानून)
• डीबीएम और एमबीए (व्यवसाय प्रबंधन)
• बैचलर्स इन जर्नलिज्म (पत्रकारिता)
• एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, सोशियोलॉजी, इकोनॉमिक्स, संस्कृत, हिस्ट्री, इंग्लिश लिटरेचर, फिलोसॉफी, पॉलिटिकल साइंस, एंसिंट इंडियन हिस्ट्री, कल्चर एंड आर्कियोलॉजी, और साइकोलॉजी।
इन डिग्रियों को प्राप्त करने के लिए, उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश लिया और एक ही समय में कई विषयों की पढ़ाई की। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उनका नाम भारत के सबसे योग्य व्यक्ति के रूप में दर्ज किया गया था।

आईएएस से लेकर युवा विधायक तक: डॉ. जिचकर  सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही सीमित नहीं थे। उनकी प्रतिभा बहुआयामी थी। उन्होंने 1978 में आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) और फिर 1979 में आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा) की परीक्षा पास की। हालांकि, उनकी असली रुचि राजनीति में थी। मात्र 26 साल की उम्र में, उन्होंने अपनी आईएएस की नौकरी छोड़ दी और 1980 में वे देश के सबसे युवा विधायक के तौर पर चुने गए।
राजनीति में भी वे सफल रहे और उन्होंने महाराष्ट्र सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों को संभाला। एक राजनेता के रूप में भी उनका ज्ञान और समझदारी हमेशा उनके काम आई।

ज्ञान की भूख और जीवन का सबक : डॉ. श्रीकांत जिचकर का पूरा जीवन ज्ञान अर्जन में बीता। उनके जीवन से हमें ये सीख मिलती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि यह अपने आप में एक अंतहीन यात्रा है। उनका जुनून किसी पद या सम्मान के लिए नहीं था, बल्कि ज्ञान की खोज के लिए था। वे एक सच्चे विद्यार्थी थे, जिन्होंने हर विषय को समझने और सीखने में आनंद लिया।

डॉ. जिचकर  का दुखद निधन 2004 में 49 साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में हो गया। उनका निधन भारत के लिए एक बड़ी क्षति था। लेकिन उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती और सीखने की कोई उम्र नहीं होती।
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