पानी को लेकर इंदौर में हाहाकार, सत्ता पक्ष के पार्षद भी लोगों को आश्वासन दे देकर थक गए, एक ही नारा, पानी दो पानी दो !
इंदौर में पानी के संकट ने विकराल रूप ले लिया है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में लोग पानी की कमी से परेशान हैं। हालात यह हैं कि कई क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके कारण लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना पड़ रहा है।
टैंकर पहुंचते ही पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। नगर निगम की ओर से ट्रैक्टर और टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रहवासियों का कहना है कि यह व्यवस्था जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। एक तरह से शहर में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। लोग जमकर गुस्से में हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि अगर प्रशासन शहर को पानी नहीं पिला सकता तो जिम्मेदार इस्तीफा क्यों नहीं दे देते।
कांग्रेस भी हमलावर : इधर कांग्रेस भी स्थानीय प्रशासन पर हमलावार है। शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नैतृत्व में लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। पानी को लेकर अलग अलग कॉलोनियों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। आलम यह है कि खुद बीजेपी के पार्षद अपने प्रशासन से पानी नहीं मिलने के कारण नाराज हैं। वे लोगों को आश्वासन दे देकर थक गए हैं। शनिवार को बीजेपी पार्षद लालबहादूर वर्मा लोगों को लेकर विधायक रमेश मेंदोला के घर प्रदर्शन करने पहुंच गए थे।
पानी को लेकर शहर में गुस्सा : रविवार को पानी की समस्या को लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कांग्रेस नेताओं और स्थानीय रहवासियों ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी जताई। सबसे बड़ा प्रदर्शन पालदा चौराहे पर देखने को मिला जहां वार्ड-75 के पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में रहवासियों ने चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब साढ़े 9 बजे शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अभी तक जारी है। उधर, दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी पानी की समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में वार्ड-27 के रहवासी और कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर उतरे।
कई दिनों से नहीं मिल रहा पानी : प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई दिनों से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। घरों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि कई परिवार दूर-दराज के इलाकों से पानी लाने को मजबूर हैं।
जहां लिखा पीने योग्य नहीं उसी को पी रहे लोग : इंदौर पानी के संकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस हैंडपंप पर लाल रंग से लिखा गया है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है, उसी हैंडपंप से लोग पानी भरकर पीने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में ऐसा करना पड रहा है। अगर प्रशासन पर्याप्त पानी उपलब्ध कराता तो यह स्थिति ही नहीं आती।
बता दें कि पानी की सप्लाय में भी गड़बड़ी की जा रही है। जिसके चलते मुख्य सचिव ने साफ कहा कि टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। जरूरत वाले क्षेत्रों तक समय पर पानी पहुंचे, इसकी रोज समीक्षा की जाए। साथ ही टैंकरों के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
सीएम ने ली कलेक्टरों की बैठक : प्रदेश के सीएम मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव ने कलेक्टरों की बैठक ली गई है। टैंकरों की मॉनिटरिंग, रोजाना समीक्षा और शिकायतों के त्वरित निराकरण के आदेश जारी किए गए हैं।
सभी अधिकारी-कर्मचारी छुट्टी निरस्त : बैठक में यह भी तय किया गया कि पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियां फिलहाल रद्द रहेंगी। केवल बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही अवकाश मंजूर होगा।
15 सौ करोड़ रुपए जारी : सरकार ने ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट से निपटने के लिए बोरवेल और अन्य कार्यों हेतु 1500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। पंचायतों को संधारण कार्यों के लिए 55 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि भी दी गई है।
Edited By: Naveen R Rangiyal
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