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Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?
Spiritual Guru Merwan Sheriar Irani: अवतार मेहेर बाबा 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और गुरु थे। उनका वास्तविक नाम मेरवान शेरियार ईरानी था। वे प्रेम, करुणा, सेवा और मानव एकता का संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। मेहेर बाबा का सबसे अनूठा संकल्प था कि उन्होंने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया और फिर कभी बोलकर संवाद नहीं किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व/ Silence Day मनाया जाता है।ALSO READ: कब है गुरु पूर्णिमा 2026 में? जानें तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
अवतार मेहेर बाबा कौन थे?
जन्म और मूल नाम: उनका जन्म 25 फरवरी 1894 को पुणे में एक पारसी (ईरानी) परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम मेरवान शेरियर इरानी था। 'मेहेर बाबा' नाम उन्हें उनके शुरुआती शिष्यों ने दिया, जिसका अर्थ है 'दयालु पिता'।
आध्यात्मिक यात्रा: जब वे 19 वर्ष के थे, तब उनकी मुलाकात एक प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बाबाजान से हुई, जिन्होंने मेरवान के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत की। इसके बाद वे शिरडी के साईं बाबा, उपासना महाराज, नारायण महाराज और ताजुद्दीन बाबा जैसे महान आध्यात्मिक गुरुओं के संपर्क में आए।ALSO READ: Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होंगे चातुर्मास, 4 महीने के लिए लग जाएगी मंगल कार्यों पर रोक
कार्य: उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास 'मेहेराबाद' को अपना मुख्य केंद्र बनाया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों, गरीबों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों, जिन्हें वे 'मस्त' कहते थे की सेवा के लिए कई औषधालय, स्कूल और आश्रम खोले।
प्रसिद्ध संदेश: उनका सबसे प्रसिद्ध कथन है: 'I have come not to teach, but to awaken' (उन्होंने अपने प्रसिद्ध 'यूनिवर्सल मैसेज'/ Universal Message में कहा था, मैं यहां सिखाने नहीं, बल्कि जगाने आया हूं) और उनका एक सार्वभौमिक नारा है— 'Don't worry, be happy' (चिंता मत करो, खुश रहो)। 31 जनवरी 1969 को मेहराबाद, अहमदनगर (महाराष्ट्र) में उन्होंने महासमाधि ली।
मौन पर्व (Silence Day) कब मनाया जाता है?
मेहेर बाबा के अनुयायियों और प्रेमियों द्वारा हर साल 10 जुलाई को 'मौन पर्व' के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक गुरु मेहेर बाबा के अनुयायियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया था, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जुलाई को 'मौन दिवस' मनाया जाता है।
मौन पर्व क्यों मनाया जाता है?
मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था, जो उनके जीवन के अंत (1969 में देहत्याग) तक यानी 44 वर्षों तक लगातार जारी रहा। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है।
बाबा के मौन रहने और इस पर्व को मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
शब्दों से परे संवाद: मेहेर बाबा का मानना था कि ईश्वर अनादि काल से मौन रहकर काम कर रहा है। इंसानों ने ईश्वर की वाणी यानी शब्दों को समझने के बजाय उन पर विवाद करना शुरू कर दिया। इसलिए उन्होंने कहा कि वे वाणी से नहीं, बल्कि सीधे लोगों के 'हृदय' से संवाद करेंगे।
आध्यात्मिक अनुशासन: जब बाबा मौन थे, तो वे शुरू में एक 'अल्फाबेट बोर्ड'/ अक्षर पट्टिका की मदद से और बाद में केवल हाथ के इशारों से बात करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों को सिखाया कि जीभ का मौन दरअसल मन को शांत करने और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने की पहली सीढ़ी है।
प्रेम की गहराई: बाबा के शिष्यों के अनुसार, बाबा का कहना था कि जब दो लोग गुस्से में होते हैं तो उनके दिलों की दूरी बढ़ जाती है, इसलिए वे चिल्लाते हैं। लेकिन जब दो लोग गहरे प्रेम में होते हैं, तो वे बहुत धीरे बोलते हैं, और जब प्रेम पराकाष्ठा पर होता है, तो शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ती; केवल मौन ही काफी होता है।
मौन पर्व कैसे मनाया जाता है?
हर साल 10 जुलाई को मेहेर बाबा के अनुयायी स्वेच्छा से 24 घंटे (9 जुलाई की आधी रात से 10 जुलाई की आधी रात तक) का पूर्ण मौन व्रत रखते हैं। आज भी इस दिन वे अपनी सामान्य दिनचर्या के काम करते हुए भी किसी शब्द का उच्चारण नहीं करते और ईश्वर के नाम का मानसिक स्मरण करते हैं। उनका प्रमुख आश्रम मेहराबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) में स्थित है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उनके अनुयायी भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में भी बड़ी संख्या में हैं।
अवतार मेहेर बाबा मौन पर्व- FAQs
1. अवतार मेहेर बाबा कौन थे?
वे 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने प्रेम, सेवा और मानव एकता का संदेश दिया।
2. मौन पर्व कब मनाया जाता है?
हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है।
3. मेहेर बाबा ने मौन कब धारण किया था?
उन्होंने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था।
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