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Last Updated : बुधवार, 13 मई 2026 (18:34 IST)

नारद जयंती 2026: ब्रह्मांड के पहले 'इंफॉर्मेशन ऑफिसर' देवर्षि नारद की 5 अनसुनी गाथाएं

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अक्सर हम नारद मुनि को फिल्मों में 'नारायण-नारायण' कहते हुए इधर की बात उधर करने वाले एक मजाकिया पात्र के रूप में देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे ब्रह्मांड के पहले पत्रकार, महान संगीतज्ञ और भगवान विष्णु के सबसे चतुर रणनीतिकार थे? ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया को मनाई जाने वाली नारद जयंती पर आइए जानते हैं देवर्षि से जुड़ी वे बातें, जो शायद ही आपने पहले कभी सुनी हों।
 

1. ब्रह्मा के 'मन' से जन्म और 'देवर्षि' का रुतबा

नारद जी कोई साधारण ऋषि नहीं, बल्कि ब्रह्मा जी के 'मानस पुत्र' हैं। उन्हें 'देवर्षि' की उपाधि प्राप्त है—एक ऐसा पद जो केवल उन्हें मिलता है जिनमें दिव्य ज्ञान और कठोर तप का संगम हो। वे केवल संदेशवाहक नहीं, बल्कि नारद भक्ति सूत्र जैसे महान ग्रंथ के रचयिता भी हैं।
 

2. क्यों नहीं रुक पाते एक जगह? (शाप या वरदान?)

नारद मुनि हमेशा घूमते क्यों रहते हैं? इसके पीछे एक रोचक कहानी है। राजा प्रजापति दक्ष ने नारद जी को शाप दिया था कि वे दो मिनट से ज्यादा एक जगह नहीं ठहर पाएंगे। लेकिन नारद जी ने इस शाप को लोक-कल्याण का माध्यम बना लिया और तीनों लोकों में सूचनाओं का आदान-प्रदान करने लगे।
 

3. जब नारद को बनना पड़ा 'स्त्री'

हैरान रह गए? पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु की माया समझने के प्रयास में नारद जी ने एक सरोवर में स्नान किया और स्त्री रूप धारण कर लिया। वे 12 वर्षों तक राजा तालजंघ की रानी बनकर रहे। बाद में श्री हरि की कृपा से पुनः उसी सरोवर में स्नान कर वे अपने असली स्वरूप में लौटे।
 

4. बंदर जैसा चेहरा और भगवान विष्णु को शाप!

यह किस्सा सबसे मशहूर है। नारद जी माता लक्ष्मी से विवाह करना चाहते थे। उन्होंने भगवान विष्णु से 'हरि' जैसा रूप मांगा। 'हरि' का एक अर्थ विष्णु होता है और दूसरा बंदर। भगवान ने उन्हें बंदर का चेहरा दे दिया। स्वयंवर में मजाक बनने के बाद क्रोधित नारद ने विष्णु जी को शाप दिया कि उन्हें भी पृथ्वी पर 'स्त्री वियोग' सहना होगा (यही कारण था कि राम अवतार में उन्हें माता सीता से अलग होना पड़ा)।
 

5. गंधर्व से 'दासी पुत्र' और फिर 'देवर्षि' तक का सफर

नारद जी का सफर संघर्षों भरा रहा। पहले कल्प में वे उपबर्हण नाम के गंधर्व थे। ब्रह्मा जी के शाप से वे एक दासी के पुत्र के रूप में जन्मे। मात्र 5 वर्ष की आयु में संतों की सेवा कर उन्हें वह ज्ञान मिला, जिसने उन्हें अंततः ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और 'देवर्षि' के रूप में पुनर्जन्म दिलाया।
 

नारद मुनि से जुड़ी कुछ 'क्विक' बातें:

नारद संहिता: ज्योतिष का एक अद्भुत ग्रंथ।
लीला पात्र: वे 'चुगली' नहीं करते, बल्कि भगवान की लीला को पूरा करने के लिए परिस्थितियों का निर्माण करते हैं।
त्रिलोक संचारक: उनके पास स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में बेरोक-टोक घूमने का 'वीजा' है।
निष्कर्ष: देवर्षि नारद भक्ति और बुद्धि का वो मेल हैं, जो हमें सिखाते हैं कि संवाद (Communication) ही दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें