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Biography of Rabindranath Tagore : जानिए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी

मंगलवार,मई 5, 2020
Tagore Biography
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गुरुदेव का कहना है कि हम लोग पृथ्वी पर प्राचीनतम देश की संतान हैं। पराये धर्म को स्वीकार करने की अपेक्षा मृत्यु स्वीकारना श्रेष्ठ है।
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अपनी सुयोग्य लेखन क्षमता से करोड़ों पाठकों के दिलों पर राज करने वाले गुरुदेव का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। आठ वर्ष की नन्ही उम्र से उनकी लेखन यात्रा आरंभ हुई।
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रवीन्द्रनाथ टैगोर नोबेल पुरस्कार विजेता एवं भारतमाता के ऐसे सच्चे सपूत हैं, उन्हें हम नमन करते हैं।
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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आदि शंकराचार्यजी का काल लगभग 2200 वर्ष पूर्व का है। दयानंद सरस्वती जी 137 साल पहले हुए थे। आज के इतिहासकार कहते हैं कि आदि शंकराचार्य का जन्म 788 ईस्वी में हुआ और उनकी मृत्यु 820 ईस्वी में। मतलब वह 32 साल जीए। अब हम असली बात समझते हैं।
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कवि सूरदास का जन्म दिल्ली के पास सीही नाम के गांव में बहुत निर्धन सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके तीन बड़े भाई थे।
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श्री रामानुजाचार्य की पूजा पूरे देश में की जाती है। भारत के दक्षिणी, उत्तरी हिस्सों में उनके भक्त यह दिन विशेष उत्सव के रूप में मनाते हैं।
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महर्षि ऋचिक के पुत्र जमदग्नि अपनी सहधर्मिणी रेणुका के साथ नर्मदा के निकट पर्वत शिखर पर जमदग्नेय आश्रम (अब जानापाव) में तपस्यारत थे। उन्होंने पराशक्ति का आह्वान किया
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श्री सत्य साईं बाबा का जन्म 23 नवंबर 1926 को आंध्रप्रदेश के पुट्‍टपर्थी गांव में हुआ था। वे पेदू वेंकप्पाराजू एवं मां ईश्वराम्मा की 8वीं संतान थे। सत्यनारायण भगवान की पूजा का प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात
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सिंध प्रांत के हिन्दुओं में झूलेलाल को पूजने पूजने की बहुत मान्यता है। सिंध प्रांत के हिन्दुओं को सिंधी कहा जाता है। आओ जानते उनके बारे में पांच खास बातें। झूलेलाल की जयंती चैत्र शुक्ल माह की द्वितीया को आती है।
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20 मार्च को मां कर्मादेवी जयंती मनाई जा रही है। मां कर्मादेवी भगवान की महान भक्त थीं, इसलिए श्रीकृष्ण ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे।
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15 मार्च 2020, रविवार को एकनाथ षष्‍ठी मनाई जा रही है। प्रसिद्ध मराठी संत एकनाथ जी का जन्म हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र कृष्ण षष्ठी को पैठण में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री सूर्यनारायण तथा माता का नाम रुक्मिणी था।
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संत तुकाराम का जन्म 17वीं सदी में पुणे के देहू कस्बे में हुआ था। उनके पिता छोटे-से काराबोरी थे। उन्होंने महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन की नींव डाली।
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चैतन्य महाप्रभु ऐसे संत हुए हैं जिन्होंने भक्ति मार्ग का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। चैतन्य देव का आविर्भाव पूर्वबंग के अपूर्व धाम नवद्वीप में फाल्गुन पूर्णिमा, होली के दिन हुआ था
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संत कवि दादू दयाल का जन्म फागुन सुदी आठ बृहस्पतिवार संवत् 1601 (सन् 1544 ई.) को अहमदाबाद हुआ था। उनके पिता का नाम लोदीराम और माता का बसी बाई था। उनके पिता धुनिया थे। पिंजारा रुई धुनने वाली जाति को धुनिया भी कहा जाता है। दादू दो पुत्र गरीबदास और ...
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भारत के एक महान संत एवं विचारक रहे स्वामी रामकृष्ण परमहंस का जन्म तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था।
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यह कहानी महाराष्ट्र के महान संत ज्ञानेश्वर से जुड़ी हुई है। ज्ञानेश्वर का जन्म 1275 ईस्वी में महाराष्ट्र के अहमदनगर ज़िले में पैठण के पास आपेगांव में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था। 21 वर्ष की आयु में ही संसार का त्यागकर समाधि ग्रहण कर ली ...
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राष्ट्रसंत गाडगे बाबा सच्चे निष्काम कर्मयोगी थे। उनका बचपन का नाम डेबूजी झिंगराजी जानोरकर था। गाडगे बाबा का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र
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महर्षि दयानंद सरस्वती ऐसे पहले महामानव थे, जिन्होंने वेदों को सत्य विद्याओं की पुस्तक कहा ही नहीं सिद्ध भी किया। ईश्वर और उसका दिव्य ज्ञान वेद। ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत सर्वज्ञ ईश्वर का दिया
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