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Holika Dahan 2026: पूर्णिमा को है ग्रहण, कब करें होलिका दहन..!

Updated: मंगलवार, 3 मार्च 2026 (09:26 IST)
When to burn Holika: संवत् 2082 में रंगो का त्योहार होली 03 मार्च 2026, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा दिन मंगलवार को आ रहा है किंतु इस दिन चन्द्रग्रहण और भद्रा होने से देश का जनमानस इस उलझन में है कि आखिर होलिका दहन किस दिन और किस समय किया जाए! इस पशोपेश की स्थिति से मुक्ति के लिए हमारे शास्त्रों में कई मार्गदर्शन और निदानों का उल्लेख वर्णित है।ALSO READ: होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया, कब मनाएं होली और धुलंडी?

हम उन्हीं के आलोक में इस उलझन का समाधान प्राप्त कर होलिका-दहन का शुद्ध समय 'वेबदुनिया' के सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं।

 

भद्रा में वर्जित है होलिका-दहन

 
शास्त्रानुसार भद्राकाल में होलिका-दहन नहीं किया जाता है। भद्राकाल में होलिका-दहन करने से राजा को हानि व प्रजा को कष्ट होता है व राष्ट्र में विद्रोह एवं अशांति होती है। भद्राकाल में होलिका-दहन किया जाना शास्त्रानुसार निषिद्ध है। 
 
02 मार्च को भद्रा सायंकाल 05 बजकर 58 मिनट से प्रारंभ होकर अंग्रेजी तारीख 03 मार्च 2026 को प्रात: 05 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। शास्त्रानुसार पंचांग में दिन की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय के रूप में की जाती है।

03 मार्च 2026 को सूर्योदय प्रात: 06 बजकर 39 मिनट पर होगा जबकि भद्रा की समाप्ति प्रात: 05 बजकर 30 मिनट पर हो जाएगी। इस सिद्धांत के अनुसार 03 मार्च 2026 को भद्रा नहीं रहेगी। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि समस्त विद्वान भद्राकाल की गणना में मुहूर्त शास्त्र के इस अति महत्वपूर्ण सिद्धांत की उपेक्षा कर रहे हैं जिसके अंतर्गत दिनमान की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय की अवधि में मान्य है।
 

पूर्णिमा तिथि

 
फाल्गुन शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ दिनांक 02 मार्च 2026, दिन सोमवार को सायंकाल 05 बजकर 58 मिनट से होगा एवं समाप्ति दिनांक 03 मार्च 2026, दिन मंगलवार को सायंकाल 05 बजकर 10 मिनट पर होगी। शास्त्रानुसार होलिका-दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा को प्रदोषकाल में किया जाना चाहिए। इस दृष्टि से पूर्णिमा के दिन अर्थात् 03 मार्च 2026 होलिका-दहन में भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा।
 

चंद्रग्रहण बनेगा बाधक

 
उपर्युक्त विश्लेषण से पाठकगण इस तथ्य से भलीभांति अवगत हो गए होंगे कि भद्रा तो 03 मार्च 2026 को होलिका-दहन में बाधक नहीं है किंतु इस दिन खग्रास/ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण होने से पुन: होलिका-दहन के शुद्ध समय और दिन के बारे पुनर्विचार करने की आवश्यकता होगी क्योंकि चंद्रग्रहण के सूतक काल में भी होलिका-दहन किया जाना वर्जित है।ALSO READ: Holi: बरसाना में गड़ा होली का डांडा, ब्रज में शुरू हुआ 40 दिनों का रंग और प्रेम उत्सव
 
संवत् 2082 दिनांक 03 मार्च 2026, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा दिन मंगलवार को भारतीय समयानुसार चंद्र का छाया प्रवेश मध्यान्ह 02 बजकर 14 मि., स्पर्श 03 बजकर 20 मि., मध्य 05 बजकर 05 मि., उन्मीलन 05 बजकर 30 मि., एवं मोक्ष सायंकल 06 बजकर 47 मि. पर होगा।

03 मार्च 2026 को भारत में चंद्रोदय सायंकाल लगभग 06 बजकर 22 मि. पर होगा जबकि ग्रहण का मोक्ष 06 बजकर 47 मि. होगा, अस्तु भारत में चंद्रग्रहण अपने ग्रस्तोदय रूप में लगभग 25 मि. तक रहेगा, अत: जिन-जिन स्थानों में चंद्रोदय; ग्रहण के मोक्ष से पूर्व हो रहा है वहां यह ग्रहण दृश्य होगा।

भारत में दृश्य होने के कारण ग्रहण का सूतक और यम-नियम सभी देशवासियों पर प्रभावी होंगे। अब पुन: यह यक्ष प्रश्न उपस्थित होता है कि होलिका-दहन आखिर कब किया जाए?

 

02 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजे करें होलिका-दहन

 
उपर्युक्त समस्त विश्लेषण और शास्त्रीय मार्गदर्शन अनुसार होलिका-दहन दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजे से 12:30 के मध्य किया जाना शास्त्रसम्मत रहेगा क्योंकि इस अवधि में भद्रा के मुख की पांच घटियां अर्थात् 02 घंटे व्यतीत हो चुके होंगे जो कि भद्रा का शास्त्रसम्मत परिहार है, वहीं दूसरा परिहार यह कि 02 मार्च को पूर्वार्द्ध की भद्रा है जो केवल दिन में त्याज्य होती है, रात्रि में नहीं एवं 02 मार्च को पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ सायंकाल 05 बजकर 58 मिनट से हो जाएगा।

अत: पूर्णिमा तिथि, पूर्वार्द्ध की भद्रा की पांच घटियां व्यतीत होना और ग्रहण का सूतक लगने से पूर्व का समय होने के कारण दिनांक 02 मार्च 2026 को रात्रि 11 बजे से 12 बजकर 30 मिनट के मध्य होलिका-दहन किया जाना सर्वाधिक शुद्ध एवं शास्त्रसम्मत रहेगा। फगुआ उत्सव दिनांक 04 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।ALSO READ: होली कब है, 2, 3 या 4 मार्च 2026 को?
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

लेखक के बारे में
पं. हेमन्त रिछारिया
ज्योतिर्विद पं. हेमन्त रिछारिया ज्योतिष प्रभाकर उपाधि से सम्मानित हैं। विगत 12 वर्षों से ज्योतिष संबंधी अनुसंधान एवं ज्योतिष से जुड़ी गलत धारणाओं का खंडन कर वास्तविक ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहे हैं। कई ज्योतिष आधारित पुस्तकों का लेखन।.... और पढ़ें

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