सूर्य-राहु युति कुंभ राशि में: 1 महीने तक रहेगा ग्रहण योग, इन 3 उपायों से बचेंगी परेशानियां
surya aur rahu ki yuti ke upay: 13 फरवरी 2026 को सूर्य ने कुंभ राशि में प्रवेश करके राहु के साथ युति बनाई है जिसे ग्रहण योग कहा जा रहा है। यह ग्रहण योग 13 फरवरी से लेकर 15 मार्च तक रहेगा। इसी दौरान महाशिवरात्रि और होली का पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान यदि आप मात्र 3 उपाय करते हैं तो इस अशुभ योग का राशिफल में ग्रह गोचर कुछ भी हो आपकी राशि पर प्रभाव नहीं होगा।
1. सूर्य को नित्य अर्घ्य अर्पित करें:
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प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व शुद्ध होकर स्नान करें।
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तत्पश्चात उदित होते सूर्य के समक्ष कुश का आसन लगाएं।
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आसन पर खड़े होकर तांबे के पात्र में पवित्र जल लें।
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उसी जल में मिश्री भी मिलाएं। मान्यतानुसार सूर्य को मीठा जल चढ़ाने से जन्मकुंडली के दूषित मंगल का उपचार होता है।
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मंगल शुभ हो तब उसकी शुभता में वृद्दि होती है।
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जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्यागमन से पहले नारंगी किरणें प्रस्फूटित होती दिखाई दें, आप दोनों हाथों से तांबे के पात्र को पकड़ कर इस तरह जल चढ़ाएं कि सूर्य जल चढ़ाती धार से दिखाई दें।
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सूर्य को जल धीमे-धीमे इस तरह चढ़ाएं कि जलधारा आसन पर आ गिरे ना कि जमीन पर।
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जमीन पर जलधारा गिरने से जल में समाहित सूर्य-ऊर्जा धरती में चली जाएगी और सूर्य अर्घ्य का संपूर्ण लाभ आप नहीं पा सकेंगे।
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अर्घ्य देते समय यह मंत्र 11 बार पढ़ें- 'ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते। अनुकंपये माम भक्त्या गृहणार्घ्यं दिवाकर:।।'
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फिर यह मंत्र 3 बार पढ़ें- 'ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय, सहस्त्रकिरणाय। मनोवांछित फलं देहि देहि स्वाहा:।।'
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तत्पश्चात सीधे हाथ की अंजूरी में जल लेकर अपने चारों ओर छिड़कें।
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अपने स्थान पर ही 3 बार घूम कर परिक्रमा करें।
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आसन उठाकर उस स्थान को नमन करें।
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इसके अलावा सूर्यदेव को अर्घ्य देते समय तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें रोली, चंदन, लाल पुष्प डालना चाहिए तथा चावल अर्पित करके गुड़ चढ़ाना चाहिए। इससे सूर्यदेव की कृपा प्राप्त होती है।
2. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें:
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से यह जहां हर तरह के शत्रु से मुक्ति, कार्यक्षेत्र में पदोन्नति, व्यापार-व्यवसाय में सफलता देता है, आसान शब्दों में कहा जाए तो आदित्य ह्रदय स्तोत्र हर क्षेत्र में चमत्कारी सफलता देता है। यह धन, प्रसन्नता, आत्मविश्वास तथा समस्त कार्यों में सफलता देने वाला तथा हर मनोकामना सिद्ध करने वाला पावन स्तोत्र माना गया है।
3. तांबा के लौटे में भी पानी पीएं:
तांबा अपने एंटी-बैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटी इंफ्लेमेट्री गुणों के लिए भी जाना जाता है। यह शरीर के आंतरिक व बाह्य घावों को जल्दी भरने के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। यह हमारे शरीर में सूर्य के तेज को बढ़ाता है।