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Motivational Story : विश्वास की शक्ति

Updated: सोमवार, 24 फ़रवरी 2020 (11:12 IST)
एक बार नारदजी एक पर्वत से गुजर रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक वटवृक्ष के नीचे एक तपस्वी तप कर रहा है। नारद के दिव्य प्रभाव से वह जाग गया और उसने प्रणाम करके पूछा- हे नारद! मुझे प्रभु के दर्शन कब होंगे?
 
 
बार-बार आग्रह करने पर नारद ने बताया,  इस वृक्ष पर जितने पत्ते हैं उतने ही वर्ष और लगेंगे। नारदजी की बात सुनकर तपस्वी निराश होकर बोला- वर्षों तप करने के बाद भी अभी और तप करना होगा? इससे तो अच्छा था कि मैं गृहस्थी में रहकर पुण्य कमाता तो उससे ज्यादा फल मिलता। मैं बेकार ही तप करने आ गया। नारदजी उसकी बात सुनकर वहां से चले गए।
 
 
आगे जाकर संयोग से उन्हें एक और तपस्वी मिला। नारदजी को देखते ही वह उठ खड़ा हुआ और उसने भी प्रभु दर्शन में लगने वाले समय के बारे में पूछा। नारदजी ने कहा कि इस वृक्ष पर जितने पत्ते हैं उतने ही वर्ष अभी और लगेंगे।
 
 
उस तपस्वी ने जैसे ही यह सुना, वह खुश होकर नृत्य करने लगा कि प्रभु उसे दर्शन देंगे। उसने नारद से कहा- आज आपने मेरा विश्‍वास और बढ़ा दिया।
 
 
नारदजी मन ही मन सोच रहे थे कि इन दोनों तपस्वियों में कितना अंतर है। एक को अपने तप पर ही संदेह है। वह मोह से अभी उबर नहीं पाया और दूसरे को ईश्वर पर इतना विश्वास है कि वह वर्षों प्रतीक्षा के लिए तैयार है।
 
 
तभी वहां अचानक अलौकिक प्रकाश फैल गया और प्रभु प्रकट होकर बोले, ‘वत्स! नारद ने जो कुछ बताया वह सही था पर तुम्हारी श्रद्धा में इतनी गहराई है कि मुझे अभी और यहीं प्रकट होना पड़ा।’
 
लेखक के बारे में
अनिरुद्ध जोशी
पत्रकारिता के क्षेत्र में 26 वर्षों से साहित्य, धर्म, योग, ज्योतिष, करंट अफेयर्स और अन्य विषयों पर लिख रहे हैं। वर्तमान में विश्‍व के पहले हिंदी पोर्टल वेबदुनिया में सह-संपादक के पद पर कार्यरत हैं। दर्शनशास्त्र एवं ज्योतिष: मास्टर डिग्री (Gold Medalist), पत्रकारिता: डिप्लोमा। योग, धर्म और ज्योतिष में विशेषज्ञता।.... और पढ़ें

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