Motivational Story : राजा के निंदक

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अनिरुद्ध जोशी| पुनः संशोधित शनिवार, 22 फ़रवरी 2020 (10:46 IST)
यह एक नीति कथा है। यह कहानी है न्याय के प्रति सजग की। अभय सिंह के राज्य में शांति और समृद्धि थी और उनके राज्य की सीमाएं दूर तक फैली थीं। इसका कारण यह था कि अभय सिंह जनता के बीच लोकप्रिय था। वह प्रजा की सुख शांति के लिए निरंतर कार्य करता था। उसने अपने सभी मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दे रखे थे कि प्रजा के कल्याण की योजनाओं का अबाध रूप से संचालन किया जाए। अभय सिंह समय-समय पर राज्याधिकारियों को राज्य के भ्रमण पर भी भेजता था ताकि यह पता चल सके कि प्रजा संतुष्ट है अथवा नहीं। प्रजा को किस प्रकार की कठिनाइयां हैं और कौनसी सुविधाओं की आवश्‍यकता है। वह निरंतर विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रखता था।

एक दिन राजा अभय सिंह के गुरु उनसे मिलने आए। अभय सिंह ने अपने गुरु का स्वागत किया और उनकी सेवा में जुट गया। गुरु ने अभय से कहा- मैंने तुम्हारे पूरे राज्य का भ्रमण किया हैं। भ्रमण के दौरान मैंने पाया कि लोग तुम्हारी न्यायप्रियता, निष्पक्ष व्यवस्था और विकास कार्यों से संतुष्ट हैं। परंतु कुछ ऐसे लोग भी है, जो अकारण ही तुम्हारे कार्यों की निंदा करते हैं और तुम्हारे विरुद्ध गलत प्रचार भी करते हैं।

गुरु की बात सुनकर राजा अभय ने गंभीर मुद्रा में कहा- मैं एक बड़े और शक्तिशाली साम्राज्य का राजा हूं। प्रजा मेरा सम्मान करती है और मेरे न्याय व राज्य संचालन की सराहना करती है। यदि मैं चाहूं तो मेरे एक इशारा करने मात्र से मेरी निंदा करने वालों का मुंह बंद हो सकता है। लेकिन झूठा प्रचार और निंदा करने वालों के प्रति सोचना और कार्रवाई करके समय नष्ट करना मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि प्रजा की सुख-समृद्धि के लिए निरंतर कार्य करते रहना ही मेरे लिए महत्वपूर्ण है। अभय सिंह की बात सुनकर गुरु बहुत प्रसन्न हुए और बोले- सच्चा शासक वही है जो अपने हमेशा लक्ष्य पर दृष्टि रखे। सदैव प्रजाहित में कार्य करने वाले शासक के निंदकों का मुंह स्वयं प्रजा ही बंद कर देती है। गुरु ने अभय को आशीर्वाद दिया और चले गए।



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