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मां पर कविता

Updated: शनिवार, 12 मई 2018 (18:34 IST)
जिंदगी के एहसास में 
ओ हर वक़्त रहती 
कभी सीख बनकर  
कभी याद बनकर
 
1.
दुनिया में  नही    
दूसरी कोई समता
सन्तान से पहले 
जहाँ जन्म लेती ममता
औलाद में स्वयं    
फौलाद  भरती 
टकराती तूफानों से 
चट्टान बनकर
जिंदगी के एहसास में 
ओ हर वक़्त रहती 
कभी सीख बनकर 
कभी याद बनकर
 
 
2.
पन्नाधाय बनी कभी 
बनी जीजाबाई
अंग्रेजों से लड़कर 
कहलायी लक्ष्मीबाई
सामने पड़ा है कभी 
राष्ट्रहित जब
उदर अंश को रख 
लिया है पीठ पर
जिंदगी के एहसास में 
ओ हर वक़्त रहती 
कभी सीख बनकर 
कभी याद बनकर
 
 
3.
प्रगति को जहाँ 
रुकना पड़ा है
देवत्त्व को स्वयं
झुकना पड़ा है
सतीत्व को कसौटी पर 
सती ने रखा जब 
त्रिलोकी झूले हैं 
पालने में पड़कर 
जिंदगी के एहसास में 
ओ हर वक़्त रहती 
कभी सीख बनकर
कभी याद बनकर
लेखक के बारे में
अमरेश सिंह भदोरिया

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