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मां पर कविता
जिंदगी के एहसास में, ओ हर वक़्त रहती, कभी सीख बनकर, कभी याद बनकर, -
गजल : परछाईं झूठ की
मृग-मरीचिका-सी चाह, मन में पल रही। परछाईं झूठ की यहां, सच को छल रही। -
कविता: नदी सदा बहती रही
हमसे भी और तुमसे भी, तो बढ़ने को कहती रही। नदी सदा बहती रही, नदी सदा बहती रही। -
हिन्दी कविता : दीया रात में जलता रहा...
संघर्षों में जीवन उसका, हर पल ही ढलता रहा।, दीया रात में जलता रहा, -
हिन्दी कविता : पीड़ा...
वक़्त के थपेड़ों से, घाव जब सिलते हैं। पीड़ा को नित,संदर्भ नए मिलते हैं। -
हिन्दी कविता : चेहरा
कुटुंब की तस्वीर में, जिसने जीवन रंग भरा। शाम ढले मायूस हुआ, कैसे ओ चेहरा।
