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चीन से बदलते रिश्तों पर हिन्द‍ी कविता...

Updated: सोमवार, 7 मई 2018 (12:34 IST)
लगता तो है इस बार। 
रंग लाएगा पारस्परिक हितों पर आधारित यह प्यार ।।
भारत चाहता है एक सतत चुभन, अकुलाहट से मुक्ति,
चीन की नजर में है 
भारत का विस्तृत बाजार ।।1।।
 
कुछ भी स्थिर नहीं है,
निरन्तर बदलते इस जमाने में।
कूटनीति में देर नहीं लगती 
पास से दूर, दूर से पास आ जाने में ।।
 
देखिए गले मिल रहे हैं दो कोरिया,
कल के थे जो कट्टर दुश्मन।
संकोच नहीं है किसी को भी 
नई नीति आजमाने में ।।2।।
 
रंग ला रही है मोदी की रचनात्मक कूटनीति।
दुश्मन को भी गले लगाने की,
भूल कर उसकी सब कुरीति ।।
सहिष्णुता, दीर्घ सोच, रचनात्मकता, उदारता,
राष्ट्रीय हित, अपनी सीमाओं का ध्यान,
बिंदु है जिन पर आधारित है उनकी 
समग्र रणनीति ।।3।।
 
विश्व में बनी हमारी प्रतिष्ठा 
हमारे समर्थन में है।
हमारी आज की स्थिति, कल की संभावनाएं,
हमारे आकलन में है ।।
विकास के सोपानों पर चढ़ने का 
हमारा संकल्प और सत्वरता,
भारत का मूल्यांकन करते हुए 
संसार भर के जेहन में है ।।4।।
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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