ganesh chaturthi

धराली विनाश पर मार्मिक हिन्दी कविता: धराली की पुकार

Updated: बुधवार, 6 अगस्त 2025 (14:31 IST)
चौतीस सेकंड
बस इतना सा समय,
खीरगंगा का प्रचंड अट्टहास
और धराली का एक हिस्सा
धरती पर से मिट गया।
बादल,
जो बरसने के लिए आते हैं,
इस बार टूटकर गिरे,
मानो आकाश ने
अपना पूरा भार
धरती पर फेंक दिया हो।
 
सड़कें चीख उठीं,
घर तिनकों की तरह
धार में बह गए,
हंसते आंगन,
बच्चों की किलकारियां,
एक ही पल में
मौन हो गईं।
 
कितने लोग
बाजार देखने निकले थे,
कितनों ने
चाय की भाप में
अपने सपनों को गरम किया होगा।
किसी ने बेटी की शादी सोची होगी,
किसी ने बेटे की पढ़ाई,
किसी ने खेतों में
अगली फसल का अनुमान लगाया होगा।
और फिर
बस चौतीस सेकंड,
सब मलबे में दब गया।
 
यह मौत का तांडव था,
जो अपने रास्ते में आए
हर जीवन को निगलता चला गया।
किसी की चीखें
पत्थरों में दब गईं,
किसी की सांसें
पानी की धार में खो गईं।
बचे हुए लोग
अब ढूंढ रहे हैं
कंधों पर उठाने को अपने प्रियजन,
पर हाथ खाली लौट आते हैं।
 
धराली आज रो रही है
न केवल उन मृतकों के लिए
जो हमारे बीच नहीं रहे,
बल्कि इस निर्मम सवाल के लिए भी
कि आखिर क्यों?
क्यों बार-बार
पहाड़ की छाती चीर दी जाती है?
क्यों जंगल काटे जाते हैं,
नदियों को बांधा जाता है,
और पहाड़ों पर
कंक्रीट के बोझ डाले जाते हैं?
 
यह हादसा
सिर्फ बादल फटने का नहीं,
यह हमारी लापरवाहियों का परिणाम है।
हम भूल गए
कि प्रकृति
सिर्फ संसाधन नहीं,
मां है।
और जब उसकी छाती पर
इतना बोझ डालते हैं,
तो वह कभी न कभी
आक्रोश बनकर टूट पड़ती है।
 
धराली की आत्माएं
हमसे यही कह रही हैं
हमारे जाने का शोक मनाओ,
पर साथ ही प्रण लो,
कि अब प्रकृति को
और न सताओगे।
 
हमें चाहिए
न सिर्फ राहत दल,
बल्कि संवेदनशील नीतियां।
हमें चाहिए
जंगलों की रक्षा,
नदियों की स्वच्छता,
और पहाड़ों पर
कंक्रीट नहीं,
हरियाली का सहारा।
हमें चाहिए
सतर्कता की घंटियां,
मौसम की सटीक चेतावनियां,
और सबसे बढ़कर
प्रकृति को मां मानने का
संस्कार।
 
धराली के मृत आत्माओं
हम तुम्हें श्रद्धांजलि देते हैं।
तुम्हारा दर्द
हमारे कंधों पर रहेगा।
तुम्हारी याद
हमें बार-बार चेताएगी
कि प्रकृति से
खिलवाड़ का मूल्य
कितना भारी होता है।
 
तुम्हारी आत्माएं
शांति पाएं,
और हम
तुम्हारे अधूरे सपनों की कसम खाकर
यह वचन दें
कि धरती को फिर से
उसकी लय में जीने देंगे।
 
धराली,
तेरी चीखें
हमारी आत्मा में गूंजेंगी
जब तक हम
सचमुच नहीं सीखते
कि प्रकृति से
संधि किए बिना
मानव का भविष्य
संभव नहीं।
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है।)
लेखक के बारे में
सुशील कुमार शर्मा
वरिष्ठ अध्यापक, गाडरवारा.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मच्छर के काटने से खुजली क्यों होती है? जानें वैज्ञानिक कारण और उपचार

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

हाथों और आंखों में छिपे हैं लिवर की बीमारी के संकेत! भूलकर भी न करें इन्हें नजरअंदाज

बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

सभी देखें

रोजाना अपनाएं ये 10 जादुई आदतें, बीमारियों से रहेंगे कोसों दूर और चेहरे पर आएगा गजब का ग्लो

डॉ अंजना चक्रपाणि मिश्र की दो नवीन कृतियों 'मन अनहद नाद' और 'अनकहे से संवाद' का भव्य विमोचन

राष्ट्र निर्माता शिक्षक का सम्मान एक ही दिन क्यों?

बच्चों के मन को सबल और एकाग्र करने का आनापान ध्यान शिविर

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

अगला लेख