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तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी से रिश्तों का बिखराव

Updated: शनिवार, 14 अक्टूबर 2017 (22:59 IST)
बढ़ रही है चारों तरफ रफ़्तार जिंदगी की।  
हाई स्पीड, फिर सुपर स्पीड, अब तो प्रतीक बुलेट ट्रैन है। 
पर इस सुपर स्पीड का साथ न दे पाने के कारण,
सामाजिक रिश्तों की उजड़ती बस्तियाँ बेचैन हैं।।
 
नई कॉलोनियाँ, बँगले, नव-नगर 
हर नज़र से नए चारों ओर से। 
छिटकते पर जा रहे हैं रिश्ते सभी 
परम्परागत प्यार की मधु डोर से।।
 
नई जीवनशैलियों के वितानों तले 
लुप्त हुए परम्परगत धूप-छांव ज्यों। 
समय करवट ले रहा बेमुरव्वत 
डूब में आते से बेबस गाँव ज्यों।।
 
अजनबी सब अपने आस-पड़ोस से, 
रिश्तों में सहमे से और डरे डरे। 
नव-सभ्यता की औपचारिक मानसिकता से 
बेतकल्लुफ रिश्तों की पहल कौन करे।।
 
पीढ़ियाँ लगती हैं, सचमुच पीढ़ियाँ,
रिश्तों का रसमय संसार बसाने में। 
किसको फुर्सत है भागमभाग भरे,
आत्मकेंद्रित सोच, संकुचित चिंतन के इस ज़माने में।।
 
असंतोष, कुंठा, खीज, असहिष्णुता,
हर मोड़ पर दिखती जो सरेआम है। 
सामाजिक जीवन के ये बिखराव/तनाव 
रिश्तों की टूटन के ही परिणाम हैं।। 
लेखक के बारे में
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्‍यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय.... और पढ़ें

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