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हिन्दी कविता : होलिका दहन

Written By WD Feature Desk
Updated: मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026 (16:45 IST)
जलती अग्नि में सत्य की ज्योति,
अधर्म का हर रूप हुआ क्षीण।
भक्ति की शक्ति अमर हो उठी,
जग में गूंजा पावन नवीन।
 
होलिका की ज्वाला कहती है,
अहंकार सदा ही हारता है।
प्रह्लाद-सी अटूट आस्था,
हर संकट को पार करता है।
 
दहन हुआ अन्याय का देखो,
फूटी आशा की नई किरण।
मन के भीतर की कालिमा भी,
आज करे हम सब समर्पण।
 
राख नहीं यह केवल अग्नि की,
संस्कारों का है यह मान।
सत्य, प्रेम और विश्वास से,
जीवन हो उज्ज्वल, महान।
 
आओ मिलकर प्रण ये लें हम,
मन में न रहे कोई मलिनता।
होलिका दहन सिखलाए हमको,
जीते सदा प्रेम और विनम्रता।
 
शुभ होलिका दहन!

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