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कविता : सबने मना ली दिवाली

Updated: मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017 (14:52 IST)
पं. डॉ. भरत कुमार ओझा ''भानु'' 
 
सबने मना ली दिवाली
तो सबको ही बधाई 
पर एक बात बताओ यारों 
किसने कैसी दिवाली मनाई ?
 
क्या त्यौहार में हर कोई 
अपने लिए ही जिया ?
या किसी गरीब के घर भी
जाकर लगाया दिया ?
 
क्या किसी की मायूसी को 
दूर जरा कर पाए ?
या केवल अपने लिए ही 
खील-बताशे लाए ?
 
क्या सभी ने अपने लिए ही 
सिलवाए नए-नए कपड़े?
या किसी बस्ती के भी 
हरण किए कुछ लफड़े ?
 
अनाथाश्रमों, वृद्धाश्रमों आदि की 
क्या याद किसी को आई ?
या केवल अपने ही घरों में 
सबने मिठाई खाई ?
 
क्या अपने आंगन में ही 
सबने पटाखे फोड़े ?
या मुरझाए पड़ोसी के भी 
आंसू पोछने दौड़े ?
 
अपने लिए तो मना लेते हैं सब 
रंग-बिरंगे हर त्यौहार
जो ओरों की भी सुध लें ''भानु''
तो जग में आएगा निखार। 

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