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फूलों की सुकोमल पखुड़ियां और जिंदगी की भागम-भाग

मंगलवार,अक्टूबर 20, 2020
Article on Shabd
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ये जो बारिश है मेरे आंगन में टपकती हुई, कानों में संगीत घोलती। मेरे हिस्से के आसमान से मेरे आंगन में रोशनी फैलाती धूप। चौगान सजाते महकाते रंगबिरंगे फूल। कुछ कविताएं, कहानियां, अदरक वाली चाय के साथ हर वक्त साथ होने की राहत देते दो जोड़ा पांव। फिल्म के ...
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विश्वभर में प्रथम अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 19 दिसंबर 2011 को इस बारे में एक प्रस्ताव पारित किया था
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हार्पर कॉलिन्‍स पब्‍ल‍िकेशन से प्रकाशि‍त एक नई किताब ‘संतति‍’ में गांधी को कुछ इसी तरह याद किया गया है। कला और कवि‍ता की दृष्‍ट‍ि से। यह किताब अपनी तरह का पहला आर्ट कलेक्शन है
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एक दुष्‍कर्म के सवालों के जवाब मिलते नहीं और दूसरे दुष्‍कर्म के सवाल खड़े हो जाते हैं। सिर्फ दुष्‍कर्म ही नहीं, हाथ, पैर तोड़ दिए गए, कमर तोड़ दी गई, जबान काट ली गई और रीढ की हड्डी तोड़ दी गई।
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लखनऊ से प्रकाशित होने वाली 'कला वसुधा' त्रैमासिक प्रदर्शनकारी कलाओं की महत्वपूर्ण पत्रिका है। इसका जनवरी-जून 2020 का संयुक्तांक नाट्यालेख प्रसंग पर केंद्रित है। 364 पृष्ठों पर प्रस्तुत इस विपुल सामग्री में साहित्य के कई कालखंड समाहित हैं।
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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पति लगातार पत्नी से हार रहा था। हार बर्दाश्त करना उसके पौरुष को गवारा नहीं।
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शहीद-ए-आजम भगतसिंह की बहादुरी और क्रांति के किस्से-कहानियों को तो हर कोई जानता है, लेकिन उनका नाम भगतसिंह क्यों पड़ा, इस बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं।
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कई बार सोचा करता हूं क्या वे उनके विचारों को भी जला या बहा पाए? नहीं। उनके विचार आज भी दिल और दिमागों में आग लगाया करते हैं।
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14 सितंबर को हिन्दी दिवस है... हमारी हिन्दी भाषा नि‍त नवीन प्रगति के परचम लहरा रही है, सफलता के सोपान रच रही है, सुयश के प्रतिमान गढ़ रही है लेकिन इस बीच अवरोधों का सिलसिला भी जारी है। इस अवरोधों में सबसे पहला नाम आ रहा है वेब सीरीज का, हमने पूर्व ...
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इस प्रश्न को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि व्यवस्थापक हिंदी विरोधी हो रहे हैं।
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सन् 1966 में पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया था और वर्ष 2009-2010 को संयुक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित किया गया। तभी से लेकर आज तक पूरे विश्व में 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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वे प्राइमरी टीचर हैं हम उनको क्यों विश करें, यही होते हैं हमारे शब्द। इस सोच को बदलने की जरूरत है। शिक्षक दिवस ही शिक्षक का असली सम्मान दिवस नहीं है। उसका असली सम्मान दिवस तब होता है जब उसका पढ़ाया हुआ कोई विद्यार्थी सार्वजनिक रूप से उसको नतमस्तक ...
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शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराने के नए-नए उपाय सोचे जाते हैं, लेकिन उनके कल्याण का कोई उपाय शिक्षा नीति का विचार विषय ही नहीं बन पाता।
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इन अनिश्चित और तनावपूर्ण समय में लोग पराजित कर देने वाली भावनाओं, चिंता और भय से निपटने के लिए साधनों की तलाश कर रहे हैं।
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आईआईएम इंदौर के निदेशक डॉ हिमांशु राय ने "भारतीय ज्ञान परंपरा और एनईपी 2020" के ऊपर विस्तार में बताया।
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फेसबुक लाइव आयोजन किया और कलाकारों की मदद की एक छोटी सी कोशि‍श
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जैसा देश वैसा वेश! सांप के विष का मामला भी कुछ ऐसा ही होता है।
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शौमिक ने ट्विटर पर बताया कि वो किताबों के साथ रहता है। यानी लाइब्रेरी में रहता है।
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