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जनमानस के प्रिय रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती

गुरुवार,जुलाई 30, 2020
Premchand Jyanati 2020
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इससे ग्रस्त लोगों के लिए कई तरह के शारीरिक कार्यों को अंजाम देना मुश्किल होता है।
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प्रतिवर्ष 11 जुलाई को पूरे विश्व में जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिन विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत 1989 में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद द्वारा हुई थी।
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देश के ईंधन क्षेत्र में जैव ईंधन को शामिल करने से जुड़े कारकों और बाधाओं को समझने में मददगार हो सकती हैं।
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ऊंचाई वाले क्षेत्रों में उगाए जाने पर उसके गुणों में परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
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आज के संदर्भ में हमारी पर्सनॉलि‍टी को लेकर ब्रूस ली की यह बात सबसे ज्‍यादा प्रासंगिक और जरुरी महसूस होती है।
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पूरे शरीर में एक माइंड ही या आपका नजरि‍या ही वो ह‍िस्‍सा है जो आपकी एक्‍टि‍व‍िटी को कंट्रोल करता है।
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21 जून को विश्व संगीत दिवस (World Music Day) मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत सन् 1982 में फ्रांस में हुई थी जिसका श्रेय तात्कालिक सांस्कृतिक मंत्री जैक लो को जाता है।
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हम रात को सोते तो अपनी इन सारी च‍िंताओं के साथ ही हैं, लेक‍िन अगर हम सुबह क‍िसी परपॅज के साथ जागें तो कैसा होगा।
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ये कलाकार है जो की राजस्थानी लोक नृत्य और संगीत की सदियों पुरानी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
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कविता ‘अग्निपथ’ की तर्ज पर लिखी गई थी। इसे कोरोना के प्रति जागरुकता के लिये राजस्थान पुलिस ने प्रचारित किया था।
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माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के आयोजन ‘हिन्दी पत्रकारिता सप्ताह’ के अंतर्गत कहानीकार सुश्री प्रियंका ओम ने ‘सृजनात्मक लेखन’ विषय पर जहां अपने विचार रखें
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मुम्बई में एक फिल्म अभिनेता सोनू सूद जाने कहां से आया, और बेबस मजदूरों की मदद पर उतारू हो गया।
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इस सम्‍मान में छह मह‍िला कव‍य‍ित्री लेखक और कथाकार को शाम‍िल क‍िया गया है। इनमें से एक लाइफ टाइम एच‍ीवमेंट पुरस्‍कार भी है।
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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उनका कथा संग्रह 'कहीं कुछ नहीं' राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ था।
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पति लगातार पत्नी से हार रहा था। हार बर्दाश्त करना उसके पौरुष को गवारा नहीं।
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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भारत में अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है। 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भारत में भी प्रेस की स्वतंत्रता पर बातचीत होना लाजिमी है। आज प्रेस दुनिया में खबरें पहुंचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है।
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