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संस्कृत दिवस क्यों मनाते हैं, जानिए इस प्राचीन भाषा के बारे में खास बातें

गुरुवार,अगस्त 11, 2022
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प्रेम इसलिए भी बंधन वाला हो जाता है कि प्रेमियों का आग्रह होता है कि हमारे अतिरिक्त और प्रेम किसी से भी नहीं। लेकिन मित्रता का कोई आग्रह नहीं होता। एक आदमी के हजारों मित्र हो सकते हैं, लाखों मित्र हो सकते हैं, क्योंकि मित्रता बड़ी व्यापक, गहरी ...
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शासकीय नर्मदा महाविद्यालय नर्मदापुरम् में तुलसी जयंती के अवसर हिन्दी विभाग द्वारा 'तुलसी साहित्य: भक्ति, दर्शन और सामाजिकता' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित एवं सरस्वती पूजन से किया गया। डॉ. मिश्र ...
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आज भी देशभर के तमाम रेलवे स्‍टेशनों के बुक स्‍टॉल्‍स पर सबसे सबसे ज्‍यादा मुंशी प्रेमचंद की किताबें रखी नजर आ जाएगीं। हिंदी लेखन के लिए प्रसिद्ध हुए मुंशी जी के बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्‍होंने अपने लिखने की शुरुआत उर्दू से की थी।
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प्रेमचंद : उन्हें उपन्यास पढ़ने का ऐसी दिलचस्‍पी जागी कि किताबों की दुकान पर बैठकर ही उन्होंने सारे उपन्यास पढ़ लिए। 13 साल की उम्र में से ही प्रेमचन्द ने लिखना शुरू कर दिया था। शुरुआत में कुछ नाटक लिखे और बाद में उर्दू में उपन्यास लिखा।
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इस मौके पर मुख्‍य अतिथि के रूप में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के उपमहानिदेशक (प्रशासनिक) गंगा कुमार, विशिष्‍ट अतिथि के रूप में प्रख्‍यात कवयित्री व रंगमंच कलाकार मालविका जोशी, शिक्षाविद् रमोला कुमार और पटना लिटरेचर फेस्टिवल की ...
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विविध कलाओं में निपुण चंद्र शबनम शाह की चित्र यात्रा का सहभागी है। विभिन्न छटाओं के चंद्र की साक्षी शबनम उसे अपने संयोजन में नित्य नए आयामों में बरतती हैं।
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नई दिल्ली। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित शोध पुस्तक 'भारतनामा' को उपराष्ट्रपति श्री एम. वैंकेया नायडू जी को भेंट की गई। इस अवसर पर कई गणमान्यजन उपस्थित थे और इस पर एक संक्षिप्त चर्चा भी हुई।
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कालिदास जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक नगरी पुणे के प्रतिष्ठित महाकवि कालिदास प्रतिष्ठान द्वारा एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूर्वार्द्ध में आयोजित महाकवि कालिदास पुरस्कार समारंभ के अंतर्गत अपने अभिनव रेखांकनों और कला में नवाचार के लिए
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निर्मल वर्मा कहते रहे कि हमें अपने लगावों को पीछे छोड़ते चले जाना चाहिए। कामू को लेखन से मोह था, वो लेखन को जीता था। काफ्का लिखते रहने के बावजूद प्रकाशित होने से भयभीत था और निर्मल वर्मा एक दार्शनिक दृष्‍टि के साथ घोषणा करते हैं कि हमें अपने लगावों ...
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अभी-अभी 2019 का दिसंबर खत्‍म हुआ है, हम साल 2020 में हैं। सितंबर 1967 में लुई आर्म्‍सट्रांग ने ‘व्‍हॉट अ वंडरफुल वर्ल्‍ड’ गाना गाया था। करीब 50 साल पहले रचे इस गाने को सुनकर एक 21 साल का लड़का लिखता है- 'मेरे ग्रैंडफादर की मौत हो गई, कल शाम उनके ...
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मान लीजिए की एक मुसाफिर मीलों का सफर तय करते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़े जा रहा है। उसे उतना ही सफर और तय करना है लेकिन, वो कुछ पल ठहरकर आराम करना चाहता है। उसे एक पेड़ नजर आता है, जिसकी छांव तले बैठकर वो कुछ पलों के लिए अपनी सारी थकान भूल जाता है। पेड़ ...
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संगीत को ईश्वर की भक्ति और स्तुति करने का एक उचित मार्ग बताया है। अतः इसलिए ही संगीत को एक साधना मार्ग बताया है। संगीत की साधना से आध्यात्मिक स्तर की भी वृद्धि होती है। ऐसे कई कलाकार हैं जिन्हें अपनी साधना के कारण उस सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति हुई ...
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भारत में तथा भारत के बाहर भी अब हिंदी अपना परचम लहराने लगी है, लेकिन अभी बहुत कुछ होना बाकी है, बहुत कुछ किया जाना भी लाज़मी भी है। ‘हिंदी से प्यार है’ समूह बमुश्किल एक साल से ‘साहित्यकार तिथिवार’ और ‘साहित्यकारों को समर्पित वेबसाइट’ बनाने जैसे दो ...
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उर्दू के मशहूर साहित्यकार गोपीचंद नारंग (Gopi Chand Narang) का निधन हो गया है। नारंग देश के अग्रणी साहित्यकार थे। वे साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भी रह चुके थे। गोपीचंद नारंग को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) डीलिट की मानद उपाधि दी थी...
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पुणे की महत्वपूर्ण संस्था महाकवि कालिदास प्रतिष्ठान के अध्यक्ष वि. ग. सातपुते ने बताया कि कला व साहित्य के क्षेत्र में अपने महती योगदान से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके संदीप राशिनकर व विशिष्ट कृति ‘कुछ मेरी कुछ तुम्हारी’ से चर्चित लेखिका ...
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लेकिन अपनी रूमानी तबीयत के लिए भी वे खासे मशहूर थे। आज यानि 17 सितंबर को उनका इंतकाल हो गया था। आइए जानते हैं उनके रूमानियत वाले मि‍जाज के बारे में एक बहुत चर्च‍ित किस्‍सा।
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विगत दो वर्षों से कोरोना के चलते यह सम्मान आयोजित नहीं हो सके थे। इसके पूर्व यह सम्मान अमेरिका और कनाडा में आयोजित किए जाते रहे हैं।
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यह आयोजन पहली बार शहर में आयोजित किया गया। इससे पहले ढींगरा फ़ैमिली फ़ाउण्डेशन यह आयोजन अमेरिका में आयोजित करता था। वहीं शिवना प्रकाशन भी देश के बड़े शहरों में शहर आयोजन करता था।
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"भिया रओम" यह शब्द इंदौरी बोली की पहचान है। किसी परिचित से मिलने पर या किसी से संवाद बढ़ने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस आलेख का आरम्भ भी इसी से हुआ।
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