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तमसो मा ज्योतिर्गमय...

रविवार,अप्रैल 5, 2020
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जैसे जीते जी तुम्हारी आत्मा भटक रही है और तुम उसे भटकते हुए देख रहे हो।
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अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलंबिया में पढ़ाने वाली सुषम बेदी ने करीब आधा दर्जन उपन्यास लिखें हैं।
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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक वीरांगना हैं रानी अवंतीबाई लोधी जिनके योगदान को हमेशा से इतिहासकारों ने कोई अहम स्थान न देकर नाइंसाफी की है
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प्रत्येक वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाया जाता है, वहीं हर साल उपभोक्ता के विभि‍न्न हितों को ध्यान में रखते हुए 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस भी मनाया जाता है।
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'कला सिर्फ जीवन यापन के लिए नहीं बल्कि यह जीवन को उत्कृष्ट बनाने और उसके विस्तार के लिए ज़रूरी है।
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प्रेम भारद्वाज के संपादकीय पर एक पुस्‍तक ‘हाशिये पर हर्फ’ भी प्रकाशित की गई थी।
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मध्‍यप्रदेश कला परिषद के समकालीन सृजनकर्म पर आधारित यह पत्रिका उस्‍ताद अलाउद्दीन खां एवं कला अकादमी का प्रकाशन है।
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साहित्यिक समागम से आपले वाचनालय में आयोजित रचना संवाद कार्यक्रम भाषाई वैशिष्ट्य और समृद्धि से महक उठा।
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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सावरकर क्रांतिकारी तो थे ही, लेकिन वे कवि थे, साहित्‍यकार और लेखक भी थे। हो सकता है, क्रांतिकारी मकसद की वजह से उन्‍होंने अपने इस हिस्‍से को हाशिए पर ही रख छोड़ा हो।
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तीसरे दिन की शाम का आगाज़ शोभना चंद्रकुमार पिल्लई की एकल भरतनाट्यम प्रस्तुति से हुआ। भारतनाट्यम की उनकी यह प्रस्तुति पारंपरिक मूल्यों और नवाचार को समाहित करती हुई प्रतीत हुई।
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इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत निदेशक उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी मप्र शासन के अखिलेश ने किया।
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आज के समय में संस्कृत पढ़ने वालों की संख्या कम हो रही है, लोगों का झुकाव अंग्रेजी की तरफ हो रहा है। ऐसे में संस्कृत में शोध कार्य करना और पीएचडी की उपाधि प्राप्त करना एक सराहनीय प्रयास है।
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मालिक अर्थात शासक जो शासन करना जानता है, अपने अधिकारों के दम पर अपनी मर्जीनुसार निर्णय लेकर उन्हें सभी पर थोपता है।
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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अध्येता डॉ. सौरभ मालवीय एवं लोकेंद्र सिंह की पुस्तक ‘राष्ट्रवाद और मीडिया’ का विमोचन मीडिया विमर्श की ओर से आयोजित पं. बृजलाल द्विवेदी अखिल भारतीय साहित्यिक सम्मान समारोह में हुआ।
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केबी की मृत्‍यु के बाद मैं बेशर्म दिलचस्‍पी दिखाता हूं। हाय-हाय करता हुआ- इसी दुनिया की तरह। ‘आमतौर पर होता यही है- एक मामूली से मामूली आदमी की मौत के बाद लोग उसके कागजात में बेशर्म दिलचस्‍पी दिखाने लगते हैं’
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वह हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार होने के साथ एक कथाकार, नाटककार और आलोचक भी थे।
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प्रतिष्ठित लता मंगेशकर पुरस्कार प्राप्त करने मुंबई से इन्दौर आए मशहूर संगीतकार और मुंबई इप्टा के संरक्षक कुलदीप सिंह उनके बेटे और ख्यात ग़ज़ल गायक जसविंदर और इप्टा इंदौर के अनेक कलाकारों ने ख्याति प्राप्त शायरों की नज़्मों, गजलों से श्रोताओं को ...
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हिन्‍दी साहित्‍य में वैद साब ने अपनी एक अलग राह चुनी और उसी को पुख्ता किया था। वे पुरस्‍कारों की प्रतियोगिता और साहित्‍य समारोह से भी दूर रहे।
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