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‘सोनू सूद’ ने साबित किया कि क्‍या होती है ‘अकेले आदमी’ की ‘इच्‍छाशक्‍ति’

सोमवार,जून 1, 2020
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इस सम्‍मान में छह मह‍िला कव‍य‍ित्री लेखक और कथाकार को शाम‍िल क‍िया गया है। इनमें से एक लाइफ टाइम एच‍ीवमेंट पुरस्‍कार भी है।
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वे एक महान क्रांतिकारी, इतिहासकार, समाज सुधारक, विचारक, चिंतक, साहित्यकार थे। उनकी किताबें क्रांतिकारियों के लिए गीता के समान थीं।
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संतों की संगत कभी निष्फल नहीं होती । मलयगिर की सुगंधी उड़कर लगने से नीम भी चन्दन हो जाता है, फिर उसे कभी कोई नीम नहीं कहता।
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उनका कथा संग्रह 'कहीं कुछ नहीं' राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ था।
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पति लगातार पत्नी से हार रहा था। हार बर्दाश्त करना उसके पौरुष को गवारा नहीं।
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कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था। बचपन से कुशाग्र बुद्धि के रवींद्रनाथ ने देश और विदेशी साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि को अपने अंदर समाहित कर लिया था
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भारत में अक्सर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चर्चा होती रहती है। 3 मई को मनाए जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर भारत में भी प्रेस की स्वतंत्रता पर बातचीत होना लाजिमी है। आज प्रेस दुनिया में खबरें पहुंचाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है।
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यूनेस्को द्वारा विश्व पुस्तक तथा स्वामित्व (कॉपीराइट) दिवस का औपचारिक शुभारंभ 23 अप्रैल 1995 को हुआ था। इसकी नींव तो 1923 में स्पेन में पुस्तक विक्रेताओं द्वारा प्रसिद्ध लेखक मीगुयेल डी सरवेन्टीस को
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23 अप्रैल 1564 को एक ऐसे लेखक ने दुनिया को अलविदा कहा था, जिनकी कृतियों का विश्व की समस्त भाषाओं में अनुवाद हुआ। यह लेखक था .....
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कहते हैं कि अगर मन को शांत करना हो या सुकून चाहिए तो संगीत का रुख करना सबसे बेहतर है। संगीत एक ऐसी दवा है, जो शांति और सूकून का एहसास करवाती है। देश में लॉकडाउन के बीच हम सुबह से लेकर शाम तक कोरोना से संबधित खबरें मन को कहीं-न-कहीं विचलित जरूर करती ...
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ऑनलाइल मीटिंग्‍स भी हो रही है। व्‍हाटसएप्‍प, स्‍काइप और अन्‍य वीड‍ियो कॉल्‍स भी काम आ रहे हैं।
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आइये, चलें...कोरोना के इस घनघोर अंधकार की लड़ाई में एक और ज्योति-प्रकाश अध्याय जोड़ने चलें। सिर्फ नौ मिनिट...क्योंकि ये लड़ाई है दिए की और तूफान की। पर अंत में हमेशा ऐसे तूफान रूपी अन्धकार को भी हार मान लेनी पड़ेगी जब हमारा पूरा देश अपनी देहरी पर अपने ...
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जैसे जीते जी तुम्हारी आत्मा भटक रही है और तुम उसे भटकते हुए देख रहे हो।
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अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलंबिया में पढ़ाने वाली सुषम बेदी ने करीब आधा दर्जन उपन्यास लिखें हैं।
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प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की एक वीरांगना हैं रानी अवंतीबाई लोधी जिनके योगदान को हमेशा से इतिहासकारों ने कोई अहम स्थान न देकर नाइंसाफी की है
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प्रत्येक वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाया जाता है, वहीं हर साल उपभोक्ता के विभि‍न्न हितों को ध्यान में रखते हुए 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस भी मनाया जाता है।
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'कला सिर्फ जीवन यापन के लिए नहीं बल्कि यह जीवन को उत्कृष्ट बनाने और उसके विस्तार के लिए ज़रूरी है।
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प्रेम भारद्वाज के संपादकीय पर एक पुस्‍तक ‘हाशिये पर हर्फ’ भी प्रकाशित की गई थी।
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मध्‍यप्रदेश कला परिषद के समकालीन सृजनकर्म पर आधारित यह पत्रिका उस्‍ताद अलाउद्दीन खां एवं कला अकादमी का प्रकाशन है।
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