sawan somwar

Ganagaur Teej Festival 2026: गणगौर तीज व्रत कब है, जानें खास जानकारी

Written By WD Feature Desk
Updated: शुक्रवार, 13 मार्च 2026 (10:12 IST)
Ganagaur Teej Pooja Rituals: वर्ष 2026 में गणगौर तीज (मुख्य पर्व) 21 मार्च, शनिवार को मनाई जाएगी। गणगौर का त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। इसे बड़ी गणगौर, गौरी तृतीया आदि नामों से भी जाना जाता है।ALSO READ: Gudi padwa 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार नया साल रौद्र संवत्सर का, बृहस्पति राजा और मंगल रहेगा मंत्री
 

गणगौर पूजा 2026, शनिवार के लिए शुभ मुहूर्त:

 
तृतीया तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2026 को सुबह 02:30 बजे से।
 
तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च 2026 को रात 11:56 बजे तक।
 
पूजा का श्रेष्ठ समय (सुबह): प्रातः 07:55 से सुबह 09:26 तक।
 
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से दोपहर 12:52 तक।
 

गणगौर व्रत के बारे में 5 मुख्य बातें:

 
शिव-पार्वती की पूजा: 'गण' का अर्थ है भगवान शिव और 'गौर' का अर्थ है माता पार्वती। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए 'ईसर-गणगौर' की पूजा करती हैं।
 
कुंवारी कन्याओं का व्रत: अविवाहित लड़कियां अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस व्रत को रखती हैं।
 
16-18 दिनों का उत्सव: वैसे तो इस पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन (धुलंडी) से ही हो जाती है, जो अगले 16 से 18 दिनों तक चलती है। मुख्य पूजा चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन (तृतीया) को होती है।
 
मिट्टी की मूर्तियां: भक्त पवित्र मिट्टी से ईसर और गौर की मूर्तियां बनाते हैं, उन्हें सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाते हैं और दूर्वा (घास) व फूलों से उनकी पूजा करते हैं।
 
विसर्जन और शोभायात्रा: उत्सव के अंतिम दिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर गणगौर की भव्य शोभायात्रा निकालती हैं और अंत में मूर्तियों का पवित्र जलाशय में विसर्जन किया जाता है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: हिंदू नववर्ष उगादि और युगादि किस प्रदेश में मनाया जाता है?

लेखक के बारे में
WD Feature Desk
अनुभवी लेखक, पत्रकार, संपादक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए गहन और विचारोत्तेजक आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें

Show comments

सभी देखें

मंगल का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा 12 अगस्त तक सावधान

Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म

मिथुन में मार्गी बुध का प्रभाव: भारत समेत दुनिया में होंगे ये बड़े बदलाव

Rakhi 2026: कब है रक्षा बंधन का त्योहार, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त?

चातुर्मास में सुख-समृद्धि लाने के लिए इन 4 महीनों में राशि के अनुसार ये खास उपाय

सभी देखें

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की 12 अनूठी परंपराएं जो इस पर्व को बनाती हैं खास

बांके बिहारी मंदिर में जन्माष्टमी पर मंगला आरती का रहस्य एवं धार्मिक महत्व

मंगल-शनि का केंद्र योग बढ़ाएगा तनाव! 4 राशियों की किस्मत का पलट जाएगा पासा

गुरु और शनि के बीच बना नवपंचम राजयोग, 5 राशियों के सितारे रहेंगे बुलंदी पर

रांधण छठ शीतला सातम व्रत का महत्व और पौराणिक कथा

अगला लेख