दशहरा एक्सक्लूसिव
|
प्रश्न : आपका शुभ नाम?
उत्तर : रावण! लंकापति रावण।
प्रश्न : कैसे हैं?
उत्तर : ठीक ही हैं।
प्रश्न : इस बार ड्रेस डिजाइन किसने किया?
उत्तर : मंदोदरी गई थी, किसी फैशन डिजाइनर के पास, उसी ने सजाया है हमें!
प्रश्न : टी.वी. देखते हैं?
उत्तर : सारे कथानकों के पार्श्व में तो हम ही हैं। क्या देखें अपने को रोज-रोज!
प्रश्न : सजाते हैं, फिर जला देते हैं! आपकी प्रतिक्रिया?
उत्तर : आप लोगों के यहाँ भी तो यही गति (दुर्गति?) है। बूढ़े माँ-बाप को जीते-जी पूछते नहीं। अंत्येष्टि के पूर्व सजा कर दहाड़े मार-मार कर रोते हैं। दरअसल, ये आँसू इस बात के लिए होते हैं कि बाऊजी मरने के पहले प्रॉपर्टी टैक्स दिए बिना चल बसे।

