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पर्यावरण के लिए क्‍यों घातक जंगलों की आग?

रविवार, 11 अप्रैल 2021 (13:03 IST)
जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में असामान्य मौसमी बर्ताव देखने को मिल रहे हैं। दक्षिणी गोलार्द्ध के कई जंगलों में गर्मी के मौसम में आग लग जाती है। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में अब लगभग हर साल ही ऐसी आग लगती है। 2019 और 2020 में तो यह बहुत ही बड़ी रही।

ताजा अध्ययन के अनुसार इसने इतनी मात्रा में धुआं फैलाया कि वह समतापमंडल में विशाल ज्वालामुखी विस्फोट की तरह धुआं पहुंचाने का काम किया।

इसके नतीजे पर्यावरण के लिए बहुत ही ज्यादा नुकसानदायक होंगे। इस अध्ययन के सह लेखक और इजराइल के वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के प्रोफेसर इलान कोरेन ने कहा कि समतापमंडल में जाता हुआ इतना ज्यादा धुआं उन्होंने पहले कभी नहीं देखा या सुना।

समतापमंडल पृथ्वी के वायुमडंल की दूसरी परत है जो क्षोभमंडल की ठीक ऊपर है जहां हम रहते हैं। कोरेन का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में प्रभाव देखना हमारे लिए हैरानी की बात थी। वायुमंडल में धुएं की इतनी ज्यादा मात्रा 1991 में फिलीपींस के माउंड पिनाटूबो ज्वालामुखी से हुए उत्सर्जन के बराबर था। यह बीसवी सदी में दूसरा सबसे विशाल ज्वालामुखी उत्सर्जन था।

शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले धुआं ऑस्ट्रेलिया में पूर्व की ओर गया और फिर दो सप्ताह बाद पश्चिम की ओर वापस लौट गया। आग पहले से ही बहुत भीषण थी और उसके बाद वह दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया की ओर फैल गई जहां समतापमंडल सबसे नीचे हैं। यह इलाका पूरी दुनिया के मुकाबले सबसे पतला क्षोभमंडल वाला क्षेत्र है।

इसमें भी एक खास बात यह हो गई थी कि आग बहुत ही तीव्र तूफानों के पास हुई थी, जिससे धुंआ और ऊपर उठता चला गया। धुआं इतना ज्यादा ऊपर चला गया कि इसका पर्यावरण प्रभाव समझना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। आमतौर पर ऐसा धुआं कुछ दिन या हफ्तों के लिए पृथ्वी की निचली परत पर ही होता है।

कोरेन बताते हैं कि एक बार यह धुआं समतापमंडल में चला जाए तो वह महीनों से लेकर सालों तक वहां रह सकता है। यहां हवा बहुत तेज चलती है जिससे धुआं और ज्यादा दूर और तेजी से फैलने लगता है। कोरने का कहना है कि यह एक तरह से धुएं की पतली चादर से पूरे गोलार्द्ध के ढकने जैसा है।

शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट अवलोकन के जरिए यह भी पाया कि समतापमंडल में यह धुआं छह महीनों तक, यानि जनवरी से जुलाई 2020 तक रहा। शोधकर्ता ऑस्ट्रेलिया के जंगलों की आग से निकल कर समतपामंडल पहुंचे धुएं और दूसरे स्रोतों से पहुंचे धुएं में अंतर करने में सक्षम नहीं थे।

इस धुएं के आज भी वहां मौजूद रहने के संकेत मिल रहे हैं। इतनी देर तक वायुमंडल में धुएं का रहने का सबसे बड़ा प्रभाव इनका सूर्य से आने वाले रोशनी का प्रतिबिम्बित करना है। इससे थोड़ी ठंडक जरूर मिलेगी, खास तौर पर महासागर कम गर्म होंगे। लेकिन इससे दक्षिणी गोलार्द्ध में शैवालों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया जरूर बाधित होगी।

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