कामिका एकादशी व्रत कैसे करें और कब करें पारण? जानें सही विधि और शुभ समय
कामिका एकादशी सावन (श्रावण) माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान विष्णु (श्री हरि) को समर्पित है, जिसे करने से पापों का नाश और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इस बार यह व्रत 09 अगस्त 2026 रविवार के दिन उनयातिथि के अनुसार रखा जाएगा, जिसका पारण अगले दिन यानी 10 तारीख को होगा।
वर्ष 2026 के लिए कामिका एकादशी की तिथियां:
एकादशी तिथि प्रारम्भ- 08 अगस्त 2026 को दोपहर 01:59 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त- 09 अगस्त 2026 को सुबह 11:04 बजे तक।
पारण का शुभ समय: 10 अगस्त 2026 (सोमवार) को प्रातः 06:18 से 08:00 के मध्य पारण करना शास्त्रसम्मत और सर्वोत्तम रहेगा।
कामिका एकादशी व्रत की विधि
1. दशमी के नियम:
दशमी तिथि की शाम: एकादशी से एक दिन पहले (दशमी की शाम) सात्विक भोजन ग्रहण करें और सूर्यास्त के बाद भोजन न करें। मन में संयम और प्रभु भक्ति का भाव रखें।
2.स्नान और संकल्प:
प्रातःकाल.
एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। स्वच्छ (पीले या हल्के रंग के) वस्त्र धारण करें। हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष निर्जला या फलाहारी व्रत का संकल्प लें।
3.भगवान विष्णु का पूजन:
पूजा विधि.
- भगवान श्री हरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र को पीले कपड़े पर स्थापित करें।
- उन्हें पंचामृत और शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- पीले फूल, फल, धूप, दीप, अक्षत और तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अर्पित करें। बिना तुलसी के विष्णु जी पूजा स्वीकार नहीं करते।
4.कामिका एकादशी कथा व मंत्र:
कथा व आरती.
कामिका एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और अंत में विष्णु जी की आरती करें।
5.फलाहार व रात्रि जागरण:
दिनभर का नियम.
दिन में केवल फलाहार (दूध, फल, कुट्टू का आटा) लें। चावल, अन्न और नमक (सेंधा नमक को छोड़कर) का पूर्ण परहेज करें। संभव हो तो रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
एकादशी का पारण कैसे और कब करें?
एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका पारण (व्रत खोलना) द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक और सही समय पर किया जाए।
1. पारण के नियम:
द्वितीया/द्वादशी तिथि में पारण:
व्रत हमेशा द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले खोला जाता है।
2. हरि वासर का त्याग: द्वादशी तिथि की पहली एक-चौथाई अवधि को 'हरि वासर' कहा जाता है। हरि वासर समाप्त होने के बाद ही पारण करना शुभ होता है।
3. ब्राह्मण भोजन व दान: पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं, या अनाज, तिल, जल का पात्र, वस्त्र आदि का दान दें।
पारण सामग्री: पारण सबसे पहले तुलसी दल और जल से करें। उसके बाद सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का खाना) ग्रहण करें।
