दिलीप कुमार : एक्टिंग स्कूल

1948 में दिलीप की फिल्मों की मानो झड़ी लग गई। इस साल उनकी आधा दर्जन फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें से तीन फिल्मीस्तान की थीं - 'नदिया के पार', 'शहीद' और 'शबनम'। 'नदिया के पार' एक गाँव की दुखांत प्रेमकथा थी। 'शहीद' भी स्वतंत्रता-आंदोलन की पृष्ठभूमि पर बनी दुखांत फिल्म थी। इसी प्रकार वाडिया की 'मेला' भी मंगेतर को खोने की कहानी थी।

'शबनम' बेशक ट्रेजेडी फिल्म नहीं थी और दिलीप ने इसमें कामिनी कौशल के साथ खिलंदड़ प्रेमी की भूमिका निभाई थी। 'अनोखा प्यार' की विशेषता यह थी कि इसमें नरगिस और नलिनी जयवंत ने पहली बार दिलीप के साथ काम किया। 'घर की इज्जत' गोप और मनोरमा की चुहलबाजी से भरपूर फिल्म थी और दिलीप का इसमें नपा-तुला रोल था।

का अंदाजे बयाँ और
1949 में दिलीप की एकमात्र फिल्म 'अंदाज' प्रदर्शित हुई। मेहबूब की इस ट्रेंड-सेटर फिल्म में राज कपूर समानांतर नायक थे। इनकी नायिका थीं आधुनिका नरगिस। इसमें दिलीप ने असफल प्रेमी की भूमिका शिद्‍दत से निभाई थी। 'अंदाज' में नौशाद का संगीत था और मुकेश के चार स्वर्णिम गीत, जो आज भी लोकप्रिय हैं।

की कुल 15 फिल्मों में नौशाद का संगीत उन फिल्मों की अतिरिक्त विशेषता बन जाता और नौशाद के साथ नाम जुड़ा था- शायर शकील बदायूँनी का। 'अंदाज' ने दिलीप की ट्रेजेडी किंग उपाधि पर अंतिम मुहर लगा दी।

1950 में प्रदर्शित तीन फिल्मों में से एक थी 'बाबुल'। इसमें भी नौशाद का संगीत और तलत मेहमूद का गायन था। दो अन्य फिल्में 'आरजू' और 'जोगन' थीं, जिनमें दिलीप ने भावना-प्रधान दृश्य सूक्ष्मता से पेश किए।

'जोगन' का निर्देशन केदार शर्मा ने किया था और इसे उस जमाने की आर्ट फिल्म कहा जाता है, जिसने सिल्वर जुबली मनाई। यह दिलीप-नरगिस जोड़ी की सर्वश्रेष्ठ फिल्म मानी जाती है। यह भी प्रेम और त्याग की ही कहानी थी। इस फिल्म को एक महीने की रिकॉर्ड अवधि में पूरा कर लिया गया। 'आरजू' ऐमिली ब्रोण्ट की 'विदरिंग हाइट्‍स' पर आधारित फिल्म थी। इसके नायक के पात्र से ‍‍दिलीप को बेहद लगाव था। इसकी पटकथा इस्मत चुगताई ने लिखी थी।

1951 में 'दीदार' और 'हलचल' आई। 'दीदार' में दिलीप के साथ अशोक कुमार और नरगिस की भूमिकाएँ थीं। 'हलचल' के. आसिफ ने बनाई थी और बलराज साहनी भी इसमें थे। इस फिल्म से आसिफ से दिलीप के दोस्ताना ताल्लुकात बने, जिसकी वजह से 'मुगले-आजम' जैसी कालजयी कृति भारतीय सिने दर्शकों को प्राप्त हुई।

1952 में दिलीप ने पहली बार मधुबाला के साथ काम किया और दोनों की मोहब्बत शुरू हुई- फिल्म थी 'तराना', जिसमें तलत मेहमूद ने बहुत मीठे गीत गाए थे। इसमें दिलीप ने आँखों के जरिये अभिनय का करिश्मा दिखाया था। 1952 की दो अन्य फिल्में हैं मेहबूब की 'आन' और 'दाग'।

'दाग' का निर्देशन दिलीप के पहले डायरेक्टर अमिय चक्रवर्ती ने किया था। 'नशा मुक्ति' को लेकर बनी यह फिल्म बहुत सुलझे हुए कथानक पर आधारित थी और आज भी प्रासंगिक है। इसमें भी तलत का गायन था। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पहला फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला।



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