भारत में लोकतंत्र, उद्देश्य एवं उपलब्धियां...

भारतीय की उपलब्धियां
विश्‍व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध सांस्‍कृतिक विरासत है। इसके साथ ही यह अपने आपको बदलते समय के साथ ढालती भी आई है। आजादी पाने के बाद पिछले 69 वर्षों में भारत ने बहुआयामी सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है।
भारत कृषि में आत्‍मनिर्भर बन चुका है और अब दुनिया के सबसे औद्योगीकृत देशों की श्रेणी में भी इसकी गिनती की जाती है। इन 69 सालों में भारत ने विश्व समुदाय के बीच एक आत्मनिर्भर, सक्षम और स्वाभिमानी देश के रूप में अपनी जगह बनाई है। सभी समस्याओं के बावजूद अपने लोकतंत्र के कारण वह तीसरी दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बना रहा है। उसकी आर्थिक प्रगति और विकास दर भी अन्य विकासशील देशों के लिए प्रेरक तत्व बने हुए हैं।

हम दुनिया में एकमात्र राष्ट्र हैं जिसने हर वयस्क नागरिक को स्वतंत्रता पहले दिन से ही मतदान का अधिकार दिया है। अमेरिका जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़े लोकतंत्र है, ने स्वतंत्रता के 150 से अधिक वर्षों बाद इस अधिकार को अपने नागरिकों को दिया। 560 छोटे रियासतों का भारत संघ में (विलय) हुआ। किसी भी एक देश में बोली जाने वाली भाषाओं की सबसे अधिक संख्या भारत में है। करीब 29 भाषाएं पूरे भारत में बोली जाती हैं। करीब 1,650 बोलियां भारत के लोग बोलते हैं। एक दलित द्वारा तैयार संविधान भारत में है। जातीय समूहों की सबसे अधिक संख्या भारत में है।

दुनिया में सबसे ज्यादा निर्वाचित व्यक्तियों (1 लाख) की संख्या भारत में है। धन्यवाद पंचायती राज। निर्वाचित महिलाओं (पंचायतों आदि) की संख्या सबसे अधिक। स्वदेशी परमाणु तकनीक विकसित की व दुनिया का बहिष्कार झेला। सबसे कम लागत की परमाणु ऊर्जा ($: 1,700 किलोवॉट प्रति) उत्पन्न करने वाला देश भारत है। थोरियम आधारित परमाणु ऊर्जा विकसित करने वाला एकमात्र देश भारत है।

अंतरिक्ष में वाणिज्यिक उपग्रह सबसे कम कीमत में लांच करने वाला देश भारत है। परमाणु पनडुब्बी लांच करने वाले 5 देशों में से 1 भारत है। चांद और मंगल पर मानवरहित मिशन भेजने वाले 5 देशों में से एक भारत है। एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक एवं इस्पात का सबसे कम लागत निर्माता भारत है। सबसे बड़ा तांबा स्मेल्टर। वायरलैस टेलीफोनी का सबसे कम लागत वितरण भारत में है। सबसे तेजी से बढ़ते दूरसंचार बाजार। दुनिया के सबसे कम लागत का सुपर कम्प्यूटर।

निम्नतम लागत वाली कार (नैनो)। दुनिया के दोपहिया वाहनों का सबसे बड़ा उत्पादक। सबसे कम लागत व उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र शल्य चिकित्सा। दैनिक मोतियाबिंद ऑपरेशन की रिकॉर्ड संख्या, ब्रिटेन के 1 प्रतिशत कीमत पर। सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी की क्षमता लगभग 70m टन। सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश (100 मीटरिक टन)। मक्खन का सबसे बड़ा उत्पादक। विश्व की सबसे बड़ी दुग्ध सहकारी संस्था (2.6 लाख सदस्य) भारत में। दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता। चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक। तीसरा कपास का सबसे बड़ा उत्पादक। सोने का सबसे बड़ा आयातक (700 टन)। सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। संसाधित सभी हीरे का 43.90 प्रतिशत भारत उत्पादक है। तीसरा (लेन-देन की संख्या से) के सबसे बड़ा शेयर बाजार।
डाकघरों की सबसे बड़ी संख्या (1.5 लाख)। ​​बैंक खाताधारकों की संख्या सबसे अधिक। कृषि भूखंडधारकों (100 करोड़) की संख्या सबसे अधिक। गैर निवासियों (52 अरब $) से सबसे बड़ा आवक विप्रेषण रिसीवर। सबसे बड़ा अंतरदेश प्रेषण।

दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। सबसे बड़ा एकल नियोक्ता भारतीय रेल (1.5 करोड़ डॉलर)। दैनिक रेलयात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा। विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा (दिल्ली)। भारत की मिड डे मील योजना दुनिया का सबसे बड़ा भोजन कार्यक्रम है। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम दुनिया में सबसे बड़ा रोजगार देने वाला कार्यक्रम है।
भारत की सामरि‍क क्षमता में एक और शक्‍ति इस वर्ष जोड़ी गई जि‍सका नाम है- 'अरि‍हंत'। भारत इस परियोजना पर करीब 2 दशक से काम कर रहा है। भारतीय वैज्ञानि‍कों के अथक प्रयासों से भारत की नौसेना में इस अत्‍याधुनि‍क शस्‍त्र को शामि‍ल कि‍या गया जि‍सके जरि‍ए आज भारत हर तरह की सामरि‍क चुनौती का सामना करने में सक्षम है।

स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव एक अच्छे लोकतंत्र की स्थापना की कुंजी है। जैसा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एमएन वेंकटाचलैया पुस्तक की प्रस्तावना में लिखते हैं, 'एक अदना सा व्यक्ति एक अदने से बूथ तक चलने और एक अदने से कागज के टुकड़े पर पेंसिल से एक अदना सा निशान बनाकर राजनीतिक क्रांति का अग्रदूत साबित हो सकता है। भारत अपनी चुनाव प्रणाली पर निश्चित रूप से गर्व कर सकता है जिसने इस क्षेत्र के कई अन्य देशों के विपरीत सत्ता के समयबद्ध और निर्बाध हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।'
आजादी के 70 साल बाद और भारत की 1 अरब से अधिक जनसंख्या होने के बाद भी यह दावा करना मुश्किल है कि भारत सचमुच एक लोकतांत्रिक देश है। यह सच है कि इसने हर क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, फिर भी जब भूख से बेहाल आंसुओं से लबालब चेहरे नव धनाढ्यों की ओर घूरते हैं तो हम सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि हम आज कहां खड़े हैं? जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी विकास की मुख्य धारा से बाहर है।
रामचन्द्र गुहा अपनी पुस्तक इंडिया आफ्टर गांधी (पिकाडोर, 2007) में जवाब देते हैं- 'जवाब है फिप्टी-फिप्टी (50:50)।' जब चुनाव कराने और आंदोलन व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अनुमति की बात आती है, तब यह बात लागू होती है। लेकिन जब राजनेताओं और राजनीतिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली की बात आती है तो ये लागू नहीं होती है। लोकतंत्र की खामियां, विशेष रूप से इसके संचालन में, 'अनिवार्य रूप से इसकी संरचना में नहीं पाई जाती हैं।' अक्सर ये खामियां इसको चलाने वाले लोगों के चरित्र और कार्यप्रणाली में होती हैं।

इतनी उपलब्धियों के बाद भी स्वतंत्रता हासिल करने पर जिन उच्च आदर्शों की स्थापना हमें इस देश व समाज में करनी चाहिए थी, हम आज ठीक उनकी विपरीत दिशा में जा रहे हैं और भ्रष्टाचार, दहेज, मानवीय घृणा, हिंसा, अश्लीलता और कामुकता जैसे कि हमारी राष्ट्रीय विशेषताएं बनती जा रही हैं।

समाज में ग्रामों से नगरों की ओर पलायन की तथा एकल परिवारों की स्थापना की प्रवृत्ति पनप रही है। इसके कारण संयुक्त परिवारों का विघटन प्रारंभ हुआ। उसके कारण सामाजिक मूल्यों को भीषण क्षति पहुंच रही है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि संयुक्त परिवारों को तोड़कर हम सामाजिक अनुशासन से निरंतर उच्छृंखलता और उद्दंडता की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं। इन 69 वर्षों में हमने सामान्य लोकतंत्रीय आचरण भी नहीं सीखा है।

देश में बदलाव की बयार तो बह रही है। महसूस कौन कितना कर पा रहा है, यह दीगर बात है। सूचना प्रवाह के इस युग में हम समूची दुनिया से जुड़ चुके हैं। भारत देश में हर जगह, हर वर्ग एवं स्तर बदलाव की अनुभूति कर रहा है। लेकिन इस बदलाव की बहार के बीच यह बुनियादी सवाल उठाए जाने की जरूरत है कि हम जिस सम्प्रभु, समाजवादी जनवादी (लोकतांत्रिक) गणराज्य में जी रहे हैं वह सही दिशा में अग्रसर है।



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