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Coronil: डीएमए ने डॉ. हर्षवर्धन की आलोचना वाले आईएमए के बयान पर जताई आपत्ति

Updated: बुधवार, 24 फ़रवरी 2021 (11:37 IST)
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (डीएमए) ने केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की उपस्थिति में पतंजलि की कोरोनिल दवा पेश किए जाने को लेकर आईएमए के आलोचनात्मक बयान पर आपत्ति जताई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पतंजलि की कोरोनिल टैबलेट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से प्रमाणपत्र मिलने के झूठ पर सोमवार को हैरानी जताते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से स्पष्टीकरण मांगा था।
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डॉ. हर्षवर्धन की उपस्थति में ही यह दवा पेश (लॉन्च) की गई थी। पतंजलि का दावा है कि कोरोनिल दवा कोविड-19 को ठीक कर सकती है और साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि की गई है। आईएमए की ओर से सोमवार को जारी बयान में कहा गया कि देश का स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते पूरे देश के लोगों के लिए झूठ पर आधारित अवैज्ञानिक उत्पाद को जारी करना कितना न्यायसंगत है? क्या आप इस कोरोनारोधी उत्पाद के तथाकथित क्लिनिकल ट्रॉयल की समयसीमा बता सकते हैं? आईएमए ने कहा कि देश, मंत्री से स्पष्टीकरण चाहता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को स्वतः संज्ञान लेने के लिए भी पत्र लिखेगा। यह भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों का उल्लंघन है।
 
डीएमए ने आईएमए की टिप्पणी के खिलाफ मंगलवार को एक बयान जारी करते हुए कहा कि वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति की कड़ी निंदा करती है। बयान के अनुसार प्रेस विज्ञप्ति की विषयवस्तु आधारहीन, अनधिकृत, अवैध और अनादरपूर्ण है। प्रेस विज्ञप्ति की विषयवस्तु केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन की बेदाग और ईमानदार छवि के लिए मानहानिकारक है। गौरतलब है कि डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि उसने किसी भी पारंपरिक औषधि को कोविड-19 के उपचार के तौर पर प्रमाणित नहीं किया है।
 
योग गुरु रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद ने 19 फरवरी को कहा था कि डब्ल्यूएचओ की प्रमाणन योजना के तहत कोरोनिल टेबलेट को आयुष मंत्रालय की ओर से कोविड-19 के उपचार में सहायक औषधि के तौर पर प्रमाण पत्र मिला है। हालांकि पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने बाद में ट्वीट कर सफाई दी थी और कहा था कि हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि कोरोनिल के लिए हमारा डब्ल्यूएचओ जीएममी अनुपालन वाला सीओपीपी प्रमाण पत्र डीजीसीआई, भारत सरकार की ओर से जारी किया गया। यह स्पष्ट है कि डब्ल्यूएचओ किसी दवा को मंजूरी नहीं देता। डब्ल्यूएचओ विश्व में सभी के लिए बेहतर भविष्य बनाने के वास्ते काम करता है। (भाषा)

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