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कोरोनावायरस काल में पूरी दुनिया में बढ़े साइबर अपराध

Updated: सोमवार, 6 जुलाई 2020 (16:07 IST)
साइबर क्राइम (Cyber Crime) यूं तो अन्य अपराधों की तरह हर समय घटित होते हैं, लेकिन कोरोना (Coronavirus) कालखंड में जब दुनिया भर में लोग 'स्टे एट होम' या फिर कहें कि घरों में ही कैद थे तब वे सबसे ज्यादा साइबर क्राइम का शिकार हुए। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। सामान्य अपराधों की तुलना में साइबर अपराध ज्यादा दर्ज हुए। इनमें बैंक ठगी से लेकर सोशल मीडिया पर महामारी के नाम से पैसा मांगने के मामले भी शामिल हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं साइबर एक्सपर्ट वरुण कपूर ने वेबदुनिया से खास बातचीत में बताया कि किस तरह लोग साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। 
 
वरुण कपूर ने बताया कि साइबर क्राइम कई प्रकार के हैं और ये सभी घटित भी हो रहे होंगे, लेकिन सबसे ज्यादा लोगों को फिशिंग का शिकार बनाया जाता है। यह अपराध देखने में भले ही छोटा लगता हो, लेकिन यह बहुत बड़ा साइबर क्राइम है। यदि हम कोरोना काल की बात करें तो यह तनाव और अभाव का समय था। महामारी को लेकर लोगों के मन में खौफ था। छोटी-छोटी चीजों के अभाव से लोग जूझ रहे थे। इसी की आड़ में साइबर अपराधियों ने फिशिंग अटैक को बढ़ाया। इस तरह के मामलों को डर और लालच दिखाकर अंजाम दिया जाता है।
 
कपूर कहते हैं कि वर्चुअल वर्ल्ड के अपराध एक्चुअल वर्ल्ड से बिलकुल भिन्न होते हैं। असली दुनिया में जो अपराध घटित होता है वह हमें दिखाई देता है, लेकिन साइबर क्राइम के मामले में ऐसा नहीं होता। दरअसल, इस मामले में जो हम देख या सुन रहे होते हैं, वह हमें दिखाया और सुनाया भी जा सकता है। इसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं होता। इस तरह के अपराधों का कोई भी शिकार हो सकता है। 
 
किस तरह बचें : वरुण कपूर कहते हैं कि फिशिंग से बचना है तो सबसे पहले डर से बचें और किसी भी तरह के लालच में न आएं क्योंकि साइबर अपराधियों के सबसे बड़े हथियार यही हैं। इसके साथ ही अंजान से किसी भी तरह का संबंध नहीं रखें। किसी भी अंजान एसएमएस, ईमेल अटैचमेंट को डाउनलोड न करें। ऐसे व्यक्तियों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें न ही फोन कॉल अटेंड करें। किसी से भी अपने बैंक खाते, डेविट और क्रेडिट कार्ड की जानकारी साझा न करें। बैंक इस तरह की जानकारियां फोन पर नहीं मांगते। सबसे अहम बात यह है कि इस तरह का कॉल आता भी है तो उसकी पुष्टि बैंक से जरूर करें। 
 
क्या लॉकडाउन से उपजी परिस्थितियों के चलते बेरोजगारी बढ़ेगी और अपराधों में इजाफा होगा? इस संबंध में वरुण कपूर कहते हैं कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में क्या होगा, लेकिन पुलिस के लिए हमेशा ही स्थिति चुनौतीपूर्ण होती है। लॉकडाउन में जहां रेप, लूट, डकैती जैसे ट्रेडिशनल क्राइम कम हुए वहीं साइबर क्राइम बढ़े हैं। कोई भी अपराध कम या ज्यादा हो सकता है, लेकिन पुलिस इन सबसे निपटने में सक्षम है। 
साइबर अपराधों का सबसे ज्यादा शिकार कौन : वरुण कपूर कहते हैं मेरे अनुभव के मुताबिक साइबर अपराधों का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक ज्यादा होते हैं। इन्हें अतिरिक्त सुरक्षा बरतनी चाहिए। साइबर स्टॉकिंग में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है। दरअसल, असली दुनिया में तो हमें खतरा दिखाई देता है, लेकिन साइबर वर्ल्ड में खतरा दिखाई नहीं देता।
 
कपूर बताते हैं कि अव्वल तो आपको इस तरह के क्राइम से बचना ही सबसे बड़ा उपाय है। यदि कोई अपराध घटित होता है तो डिजिटल फुट प्रिंट के आधार पर उसे ट्रेस किया जा सकता है, लेकिन अपराध को यदि दूसरे देश से अंजाम दिया गया है तो निश्चित ही बड़ी समस्या होती है। हालांकि पुलिस कानून के दायरे में रहकर पूरा प्रयास करती है। आप ही खुद को बचा सकते हैं। अवेयरनेस ही सबसे बड़ा उपाय है। 
 
सोशल मीडिया का दुरुपयोग : कपूर सोशल मीडिया के दुरुपयोग की बात से इंकार नहीं करते। वे कहते हैं कि सोशल मीडिया बदलाव का बहुत बड़ा टूल है और बदलाव से ही डेवलपमेंट और इम्प्रूवमेंट होता है। सोशल मीडिया के अच्छे उपयोग हैं, वहीं कुछ दिक्कतें भी हैं। अच्छे नागरिक होने के नाते हमें अच्छाई को ही अपनाना चाहिए। वे कहते हैं कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज एक बड़ी समस्या है, इसे लोगों को समझना चाहिए। 
 
उन्होंने कहा कि न्यूज कटेंट में 70 प्रतिशत तक जानकारी फेक या फाल्स होती है। यह रिसर्च में भी सामने आया है। फेक यानी चीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना और फाल्स यानी झूठी जानकारी लोगों से शेयर करना। अत: किसी भी जानकारी पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। सोशल मीडिया का सदुपयोग करें। ओवर यूज और मिस यूज से बचें। 
सेमिनार बने वेबिनार : वरुण कपूर कहते हैं कोरोना कालखंड में सोशल डिस्टेंसिंग के चलते सेमिनार के स्थान पर वेबिनार होने लगे हैं। सेमिनार में लाइव कॉन्टेक्ट होता है और इससे लोग चीजों को बेहतर तरीके से सीख पाते हैं। हालांकि स्थान विशेष (स्कूल, कॉलेज या कोई संस्थान) के कारण सेमिनार का दायरा सीमित होता है, जबकि वेबिनार की रीच बहुत ज्यादा होती है। इसके बावजूद कपूर इस बात से इंकार नहीं करते कि वेबिनार की तुलना में सेमिनार ज्यादा प्रभावी होता है। 
 
लेखक के बारे में
वृजेन्द्रसिंह झाला
वृजेन्द्रसिंह झाला पिछले 30 से ज्यादा वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।    अनुभव : वृजेन्द्रसिंह झाला तीन दशक से ज्यादा का प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया का अनुभव है। वर्तमान.... और पढ़ें

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