Hanuman Chalisa

Life in the time of corona: कास्‍ट अवे: जिंदगी कभी न थकने वाला समंदर

नवीन रांगियाल
हम जीने की तभी कोशिश करते हैं, जब जीने के दरवाजे बंद हो जाते हैं। अभी दुनिया बंद है और मुझे बार-बार ‘कास्‍ट अवे’ याद आ रही है।

साल 2000 में टॉम हैंक्‍स की फिल्‍म आई थी ‘कास्‍ट अवे’।

जीने की आकांक्षा और जिंदा रहने के स्‍ट्रगल में टपकते खून से सनी कहानी। वो भी एक ऐसी जगह पर जहां दीवारें नहीं हैं, छत नहीं, अन्‍न नहीं, आग नहीं। कोई आवाज नहीं। ऐसे टापू पर न सिर्फ जिंदा रहना है, बल्‍कि स्‍वत: प्रेरणा से जीने के लालच को भी बनाए रखना है।

इक्‍कीस दिन नहीं, पूरे चार साल। इसमें रातें भी जोड़ लें। ‘फोर ईयर्स ऑफ सॉलिट्यूड’ 

विदाउट फूड एंड डेस्‍टिट्यूड,

बगैर किसी मकसद के। सिर्फ इतना कि बस जिंदा रहना है।

चक नॉलंड (टॉम हैंक्‍स) एक कोरियर कंपनी में काम करता है, उसका प्‍लेन क्रैश हो जाता है, एक अनजान टापू पर उसकी आंख खुलती है, जबकि उसके सारे साथियों की मौत हो चुकी है।

जाने से पहले वो अपनी प्रेमिका कैली से उपहार लेता है, उसे हग करता है, और कहता है मैं वापस लौटकर आऊंगा।

अब वो एक ऐसी जगह पर है जिसे ‘आइसोलेशन’ नहीं कहा जा सकता और न ही ‘क्‍वेरेंटाइन’।

ये कोई दार्शनिक अकेलापन नहीं, और न ही चुना गया किसी तरह का एकांत।

उसकी इच्‍छा के विरुद्ध प्रारब्‍ध का एक हादसा है। एक अचंभा।

जिसके बाद वो एक सभ्‍यता से निकलकर एक ऐसी गुमनाम दुनिया में गिर जाता है, जहां मनुष्‍य और जानवर में कोई फर्क नहीं होता। यह वो जगह है जहां मनुष्‍य अपने इंटलेक्‍ट, अविष्‍कार, अपने दर्शन-आध्‍यात्‍म और विकास पर गुमान नहीं कर सकता। उसके ऊपर सिर्फ जोर-जोर से हंस सकता है, एक ऐसी हंसी जिसके हंसने और रोने की ध्‍वनि में कोई अंतर नहीं रह जाता।

चक नॉलंड को इस जगह पर जरुर 40 की उम्र में पैदा होने की अनुभूति हुई होगी।

वो शुरुआत करता है, देखने- सुनने की। समझने की, महसूस करने की और सोचने की।

उसे एक ऐसा प्रारब्‍ध मिला है कि उसकी दो आंखों के सामने एक न थकने वाले संमदर का विस्‍तार है, लेकिन वो उसका एक बूंद पानी भी नहीं चख सकता।

वो नारियल पानी पीता है, जब वो खत्‍म हो जाता है तो बारिश का पानी और फिर ओस की बूंदें।
उसके पास आग नहीं। वो आग पैदा करता है।

खाने के लिए अन्‍न का एक दाना नहीं है, वो मछलियां और कैकडों का शिकार सीखता है।

जीने के संघर्ष में दिन कट जाता है, लेकिन शाम उसे भीतर से अकेला कर देती है। वो बात करना चाहता है, आवाजें सुनना चाहता है।

उसे अपने कोरियर पैकेट में से एक फुटबॉल मिलता है, जिस पर अपने खून के धब्‍बे को उकेरकर आंख-नाक बनाकर एक चेहरा बना लेता है। उसका नाम रख देता है विल्‍सन।

वो उसी से बातें करता है, सुनता है। एक दिन उसकी भी समंदर में डूबकर मौत हो जाती है। वो ठीक वैसे ही रोता है, जैसे कोई जिंदा इंसान मरने पर रोता है।

वो अंत तक जिंदा रहता है, और फिर से उसी दुनिया के किनारे पर पहुंचता है, जहां से वो आया था। लेकिन एक नई दृष्‍टि के साथ।

लेकिन अब उसकी प्रेमिका नहीं है, वो जा चुकी है।

और वो फिर से उसी दुनिया के एक चौराहे पर खड़ा है मुस्‍कुराता हुआ।

जिंदा रहने की उम्‍मीद को खो देना और एक दिन फिर से जिंदा रहने की आकांक्षा पाल लेना। जिंदगी यही है,

Show comments

क्या E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान हो सकता है, आयोग के फैसले से शुरू हुई नई बहस

पत्नी ने घर छोड़ा तो बेटा बन गया हैवान, बुजुर्ग मां को इतना पीटा कि मौत हो गई, पुलिस ने किया गिरफ्तार

MoU मानो तभी खुलेगा Hormuz Strait, दुनिया के सबसे बड़े समुद्री रास्ते के लिए ईरान की नई शर्त

ISRO में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफों से हलचल, सरकार ने सख्त किए नियम, Gaganyaan Mission से जुड़े कर्मियों पर विशेष फोकस

Royal Enfield Classic 350 का 2026 अपडेट लॉन्च, अब मिलेगा Slipper Clutch और Fast USB Type-C Charger; जानें नई कीमतें

सभी देखें

क्या E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान हो सकता है, आयोग के फैसले से शुरू हुई नई बहस

जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचीं डॉ. तजीन फातिमा, 38 इमारतों के ध्वस्तीकरण आदेश के बीच तेज हुई हलचल

रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक का अग्रणी केंद्र बनेगा यूपी : योगी

गुरु पूर्णिमा से पहले यूपी में तैयार होंगे 4 खास वन, किसानों से लेकर मानव-वानर संघर्ष तक का होगा समाधान

अगला लेख