योग ने मुझे समर्पण करना सिखाया : शिल्पा शेट्टी

रूना आशीष| पुनः संशोधित सोमवार, 21 जून 2021 (17:19 IST)
मैं योग सिर्फ करती ही नहीं हूं मैं योग जीती हूं। आज योग करने से मेरे अंदर इतनी सारे बदलाव आए हैं, इतनी तब्दीली आए हैं जो मैं बयां नहीं कर सकती। यह तब्दीलियां बाहर या सतही तौर पर नहीं है बल्कि अंदरूनी तौर पर है। इसलिए कैसे बताऊं, कितनी बदल गई हूं मैं?
यह कहना है शिल्पा शेट्टी का जो फिल्म इंडस्ट्री में ना सिर्फ बेहतरीन और फैशनेबल अदाकारा के तौर पर जानी जाती हैं बल्कि इनके योग करने की आदत ने लोगों की मान्यताएं योग को लेकर भी बदल कर रख दी है। अपने डांस की वजह से बल्कि अपनी फिट बॉडी की वजह से भी लोगों की नजरों में चढ़ी रहती है। शिल्पा खुद मानती हैं कि यह आसान तो नहीं रहा था।

अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस के दिन खास तौर पर योग की बात करने के लिए शिल्पा शेट्टी ने कुछ चुनिंदा पत्रकारों को आमंत्रित किया था और इसी दौरान वेबदुनिया से भी उन्होंने बातचीत की।

शिल्पा आगे बताती है कि योग आप में कितना परिवर्तन लाएगा यह कोई बता नहीं सकता है। हर व्यक्ति का अपना पैमाना होता है। हर व्यक्ति का अपना तरीका होता है, लेकिन हां तब्दीलियां आती जरूर है और अंदरूनी तौर पर अब बहुत ज्यादा बदल जाते हैं। आज से 13 साल या 14 साल पहले जब मैंने योग शुरू किया था तब मुझे जीवन को देखने और समझने का नजरिया बहुत अलग था और अब मैं बिल्कुल ही अलग व्यक्ति बन चुकी हूं।

योग में आप जैसे आसन करते जाते हैं, पहले दिन आप से नहीं होगा, दूसरे दिन शायद नहीं होगा, लेकिन लगातार जब आप इसे करते जाते हैं तो आपसे सारे आसन बेहतरीन तरीके से होने लग जाते हैं। आप अगर झुक कर अपने गांव को छूने के लिए योग करें तो पहले दिन नहीं होगा। लेकिन धीरे-धीरे आपके अंदर का जो हठ है आपके अंदर का जो अहम है आप बहुत कोशिश करते जाते हैं, झुकते हैं और एक तरीके से आपके मन का अहंकार निकल जाता है और आप योग साधना में लीन हो जाते हैं। योग ने मुझे समर्पण करना सिखाया है।
आपकी जिंदगी में योग ने कब प्रवेश किया
मेरी जिंदगी में योग ने बहुत ही साधारण तौर कब प्रवेश किया यह कहना जरा मुश्किल है। दरअसल हुआ कुछ यूं था कि कुछ सालों पहले मैं सर्वाइकल स्पांडिलाइसिस बीमारी से जूझ रही थी और उसके इलाज के दौरान मुझे मेरे डॉक्टर ने कहा कि तुम्हें ठीक होते-होते अब भुजंगासन करना चाहिए क्योंकि यह तुम्हें बहुत आराम देगा और धीरे-धीरे इससे तुम्हारे शरीर को भी फायदा पहुंचेगा और भुजंगासन कम से कम तीन से चार बार भी दिन में कर लोगी तो काफी हो जाएगा।

उसके बाद फिर मैंने इसे करना शुरू किया और भुजंगासन करते-करते मुझे लगा कि जब योग कर ही रही हूं तो क्यों न तरीके से करना सीख लूं और इसे बाकायदा एक ट्रेनिंग के साथ करना सीखना शुरु किया। इसके बाद लोगों ने मुझे कब देखा कि मैं योग करना पसंद करती हूं और उसकी बकायदा ट्रेनिंग लेकर, प्रैक्टिस करती हूं तो वह बिग ब्रदर में था। जब बिग ब्रदर में गई थी तो मैंने वहां देखा जिम तो था नहीं तो ऐसे में मेरे पास अपनी मैट हुआ करती थी। मैं उससे बैठकर अपनी ब्रीदिंग एक्सरसाइज किया करती थी।

और सच कहूं तो जिस तरीके का माहौल बिग ब्रदर में था, उसके बाद तो बहुत ज्यादा जरूरी था कि मैं योग को ही अपना लूं और योग ही मेरा बहुत बड़ा दोस्त और सहायक बन गया। बिग ब्रदर में रहते रहते जब समझ में आया कि योग में कितनी मदद की है पूरी परिस्थिति में मेरी तब लगा क्यों नहीं डीवीडी निकाली जाए या फिर एक ऐसा कोई वीडियो बनाया जाए और योग को और प्रचलित बनाने में अपनी तरीके से सहायता की जाए।

मेरे लिए यह बहुत दुख का विषय बन जाता है कि क्योंकि यह एक भारतीय मूल का होने के बावजूद भी आप जब भी योगा के बारे में गूगल करेंगे तो देखेंगे कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की योगा गुरु आते हैं और बातें करते हैं और योग पर भाषण भी देते हैं या योग सिखाते हैं। कई एप्स भी योग पर बनी है, लेकिन उसमें से भारतीय लोग कितने हैं, आप बड़ी बड़ी जगह पर चले जाएं। आपको योगा गुरु के तौर पर कई अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुरु मिल जाएंगे, लेकिन भारतीय कितने मिलते हैं कुछ मुश्किल से उंगलियों पर गिनती करने लायक है।
मैंने सोचा क्यों न भारतीय होने के नाते भारत की इस धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया जाए। एक कारण बन जाऊं, एक फूल की तरह काम कर लूं। तो एक डीवीडी बनाई। आज के जमाने में डीवीडी तो जाहिर तौर पर किसी विंटेज कलेक्शन से कम नहीं बची है लेकिन फिर भी आज भी कई लोग हैं जो मेरी डीवीडी को देखकर योगा में रुचि लेना शुरू कर रहे हैं। मैंने अपने आप में इतनी तब्दीलियां देखी हैं कि दो साल में ही मैं इतनी बदल गई थी और इस पूरे बदलाव का कारण अगर कोई रहा है तो वह योग रहा है।

आप के योग गुरु कौन रहे हैं
मेरे पहले योग गुरु शिव कुमार मिश्रा रहे हैं और वह बड़े ही सख्त किस्म के मेरे गुरु रहे हैं।

क्या आप फिटनेस में कुछ और भी है जिसे पाना चाहते हैं?
मुझे ऐसा लगता है कि फिटनेस हो या कोई भी हो जिंदगी कभी रुकती नहीं। हमेशा आगे बढ़ती रहती है। तो मैं अपने आप को एक बार फिर से खोजना चाहती हूं। अपने लिए फिटनेस के नए पैमाने ढूंढना चाहती हूं। मैं अपने आपको नया और बदलते हुए देखना चाहती हूं। अभी पिछले ही हफ्ते जब मैं सुपर डांसर के सेट पर शूट कर रही थी तो मैंने वहां के प्रोड्यूसर जो है रंजीत, उनको कहा कि देखो अब आने वाले दिनों में तुम मुझे नई शिल्पा के तौर पर पाओगे तो वह हंसकर कहने लगे, अब कुछ बचा है तुम्हारे पास जैसा तुम सुधार सकती हो, जितना है उसमें खुश नहीं हो। तो मैंने कहा नहीं बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो मैं और भी नई सीख कर कोशिश करना चाहती हूं और अपनाना चाहती हूं। अगर आप यह सोच कर रुक गए बस से बेहतरीन कुछ नहीं हो सकता तो फिर आप अपने आप को बांधकर रख रहे हैं।

इस महामारी के समय में कोई खास टिप्स देना चाहेंगे।
यह समय बहुत परीक्षा से भरा रहा है। कुछ लोगों को खुद को खो बैठा हुआ कुछ लोगों के घर में कोविड-19 अपने अपनों को खोया है और जिस तरीके की क्षति उन्हें पहुंची है उसकी भरपाई करना बड़ा ही मुश्किल है। और हालत तो इतनी बुरी थी कि अपने लोगों की अपने रिश्तेदारों की या किसी की भी अंतिम दर्शन भी नहीं ले पाए। इससे ज्यादा बुरा क्या होगा सोच भी नहीं सकते। यह समय सिर्फ बुरा समय नहीं कहूंगी। इसे डिजास्टर कहूंगी और डिजास्टर वाले समय को पार पाने के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट लगता है। ऐसे में मुझे योगा ने बहुत मदद की है।

मैं शायद पहले से ही इस बात को लेकर तैयार हो चुकी थी कि जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन अपने आप पर संयम रखना और काबू रखना बहुत जरूरी है। मैं योग के साथ-साथ लोगों को दो तीन चीजों का और महत्व समझाना चाहती हूं। पहला है कि सोना बहुत जरूरी है कई लोग नींद को इतनी अहमियत नहीं देते हैं जबकि नींद बहुत जरूरी है। आपके शरीर को आराम मिलना बहुत जरूरी है ताकि वह अगले दिन के लिए या अगले किसी काम के लिए अपने आपको तैयार कर सके।

दूसरा है आपको सही खाना खाना चाहिए। कई लोग दिन दिन भर भूखे रहते हैं और खाना नहीं खाते। यह सोचते हुए कि रात में एक बड़ा भारी खाना खा लेंगे। वह ना करें जब भूख लगती है तब खा ले, हो सके तो अपना सुबह का नाश्ता जो है, वह बहुत तरह तरह का रखें। दोपहर में खाना अच्छे से खाएं। रात का खाना हल्का-फुल्का खाए तो बेहतर होगा। किसी बात से मैं बहुत ज्यादा अमल करती हूं तो वह आयुर्वेद। आयुर्वेद मेरी पूरी आस्था है। मैं दिन की शुरुआत ऐसे करती हूं कि सुबह उठती हूं घी, काली मिर्च और हल्दी इन सब का मिश्रण लेती हूं। घी जो है वह आपको ब्रेकफास्ट याने आपका जो रात भर का पेट खाली हुआ है उसमें नया अन्न जाए उसके लिए तैयार करता है।

हल्दी जो है वह तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती ही है। उसके अलावा भी मैं यह आयुर्वेद की कई सारी बातों का पालन करती हूं। मुझे ऐसा लगता है कितना भी विकट से विकट समय आ जाए। आप उसे पार पा सकते हैं और योग उस काम में उस सफलता में आपका बहुत बड़ा मूल मंत्र साबित हो सकता है।




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