मिलाप जावेरी ने बताया 'सत्यमेव जयते' के दोनों पार्ट में है कितनी समानता

रूना आशीष| पुनः संशोधित बुधवार, 24 नवंबर 2021 (15:34 IST)
सत्यमेव जयते का पार्ट 2 उसी दिन तय हो गया था जब इसका पहला भाग हमने लोगों के सामने रिलीज किया था। लोगों ने उस फिल्म को बहुत ही अच्छी ओपनिंग भी दी थी। उसे देखते हुए मैंने को कहा कि भाई अब तो अगला भाग बनाना ही पड़ेगा। उस समय जॉन किसी और काम में उलझे हुए थे तो मैंने मरजावां बना ली और मरजावां को भी लोगों ने बहुत पसंद किया।


इसके बाद तय हुआ कि हम अप्रैल 2020 में इस फिल्म को शुरू करेंगे, लेकिन फिर यह महामारी आ गई और सभी घर पर बैठ गए। जैसे ही लॉकडाउन खुला हमने इस फिल्म की शूटिंग शुरू की और अब यह फिल्म लोगों के सामने आ रही है। यह कहना है मिलाप जावेरी का जो कि के निर्देशक हैं।

वेबदुनिया के सवालों का जवाब देते हुए मिलाप बताते हैं कि जैसे सत्यमेव जयते में दो भाइयों के बीच लड़ाई थी। इस बार दो भाई है लेकिन यह दोनों जुड़वां है। दोनों दिखने में भले ही समान हो, डबल रोल भले ही जॉन ने किया हो लेकिन दोनों में बहुत आसमानताएं भी है। एक राजनेता है तो दूसरा पुलिस ऑफिसर है। राजनेता जो है, मुद्दे की बात करता है। वहीं पर एक भाई इंस्पेक्टर है। वह इंस्पेक्टर बहुत ही हंसने खेलने वाला है। जिंदगी को थोड़े से मजे से जीने में विश्वास रखता है। बहुत सारी बातें भी करता है।

पुरानी सत्यमेव जयते और इसके दूसरे भाग में मुझे लगता है कि तीन समानता है। एक तो यह दोनों भाइयों की ही कहानी है। दूसरा दोनों भ्रष्टाचार के विषय पर बात करती हुई फिल्में है और तीसरा जैसे उसमें भी नोरा फतेही का गाना था। इस फिल्म में भी नोरा फतेही का गाना आपको देखने को मिलेगा।

इस फिल्म में जॉन के तीन रोल है, यह आइडिया कहां से आया?
दरअसल जब मैं जब कहानी लिख रहा था। तब तो यह तय किया था कि जॉन का डबल रोल किया जाएगा और जो पिता का रोल है, वह कोई और अभिनेता निभाने वाले हैं और हम नाम के बारे में सोच रहे थे। लेकिन फिर एक रात पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगा। मैंने जॉन को मैसेज किया कि जॉन मुझे लगता है पिता का रोल भी तुम्हें ही निभाना चाहिए और इस तरीके से तुम जो कैरेक्टर है फिल्म का उसमें और ज्यादा मजबूती ला सकोगे।
वैसे भी हम पहले भी एक अभिनेता को 3-3 रोल करते हुए देख चुके हैं। अमिताभ बच्चन की फिल्म 'जॉन जानी जनार्दन', रजनीकांत की फिल्म को ले लो या बैराग में दिलीप कुमार साहब के तीन रोल को ले लो। अप्पू राजा में भी तो यही हुआ था। कमल हासन साहब के तीन रोल थे। जय लावा कुसा यह जो फिल्म दक्षिण भारतीय फिल्म है, उसमें भी यही हुआ था जिसमें कि तीन भाइयों का रोल निभाने के लिए एक ही अभिनेता।

तब मुझे ऐसा लगा कि यह सब देखना बड़ा ही दिलचस्प रहेगा तो जॉन को तीन रोल दे दिए और जॉन मुझे इतने अच्छे लगते हैं, उन्हें इतना पसंद करता हूं कि मेरा बस चले तो फिल्म का हर रोल जॉन ही निभाएंगे।

आपको लॉकडाउन के दौरान शूट करते समय किन बातों का ध्यान रखना पड़ा।
हमने इस फिल्म को लॉकडाउन के दौरान लखनऊ के भीड़भाड़ वाली जगह में शूट कर किया। हम वहां पर जाकर स्थानीय प्रशासन से भी मिले और मुख्यमंत्री योगी जी से भी मिले और उनकी तरफ से जो जो सहायता हमें मिल सकती थी, उन्होंने की है। बाकी हम हमारी तरफ से हर बात का ध्यान रख रहे थे हर एसओपी को निभाया गया चाहे वह सैनिटाइजेशन की बात हो, वैवैक्सीनेशन हो या फिर मास्क पहनने की बात ही क्यों ना हो। वरना आप ही सोचिए इतनी महत्वकांक्षी फिल्म को लखनऊ के मुख्य बाजार के बीचो-बीच शूट करना और सब कुछ ठीक-ठाक तरीके से हो जाना किसी आश्चर्य से कम नहीं है।
पिछले कुछ समय से सूर्यवंशी की तारीफ करते हुए आपको बहुत सुना है। कोई खास कारण।
बिल्कुल! आप मेरा ट्विटर देख लीजिए। आप मेरा कोई सोशल मीडिया अकाउंट देख लीजिए। कोई इंटरव्यूज भी इस दौरान मैंने जब दिए हैं, वह देख सुन लीजिए, पढ़ लीजिए। मैं यही कह रहा था कि सूर्यवंशी जैसी धमाकेदार फिल्म जैसे ही सिनेमा हॉल पहुंची वैसे ही सिनेमाहॉल सिनेमाहॉल नहीं रहकर एक खेल का मैदान बन गया। बहुत सारे लोग इसे देखने के लिए आने वाले हैं। वह यह है कि पिछले डेढ़ साल से कोई फिल्म सिनेमा हॉल में आई नहीं है। सरकार लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान में रखते हुए सिनेमाहॉल में लोगों के आने को प्रतिबंधित कर चुकी थी। मैंने मान लिया था कि जिस दिन कोई बड़ी मसालेदार धमाकेदार मल्टीस्टार कास्ट फिल्म सिनेमाहॉल में आई दर्शक टूट पड़ेंगे और मेरी यह भविष्यवाणी एकदम सही साबित हुई है।

मिलाप आगे कहते हैं कि इस दौरान जब लॉकडाउन चल रहा था तो कई लोग कह रहे थे कि सिनेमा अब खत्म हो जाएगा और मैं यह बात इतने दावे से जॉन से मोनिशा से भूषण कुमार जी और निखिल से कह रहा था कि कुछ भी हो जाए सिनेमा कभी खत्म नहीं होगा। अब आप ही सोचिए ना आप मॉल में जाएं किसी इटालियन रेस्टोरेंट के बाहर आपको दो या तीन लोग इंतजार करते हुए मिल जाएंगे, लेकिन जैसे ही कोई भारतीय खाने वाला रेस्टोरेंट होगा। उसके बाहर लाइन लाइन पर लाइन लगी रहेगी। लोगों को पाव भाजी और जूस पीना पसंद आता है।

यह भारत की जनता है इन्हें इस तरीके की फिल्म पसंद आती ही है चाहे वह सूर्यवंशी हो, चाहे वह सत्यमेव जयते जैसी फिल्में क्यों ना हो। यह जरूर लगा था कि अगर कोई बहुत ही बुद्धिजीवी लोगों को पसंद आने वाली फिल्म आ गई। सूर्यवंशी के पहले तब तो कुछ नहीं कहा जा सकता। साथ ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भी धन्यवाद कहना चाहता हूं क्योंकि इस पूरे समय में इन्होंने लोगों का किया और लोगों को एक नई राह दिखाई ताकि वह और कंटेंट बना सके।



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