सनी देओल Vs इमरान हाशमी: बॉक्स ऑफिस पर 'बंटवारा 1947' और 'आवारापन 2' की महाटक्कर, जानें कौन मारेगा बाजी?
बॉक्स ऑफिस का नया कुरुक्षेत्र: 'बंटवारा 1947' और 'आवारापन 2' में कौन साबित होगा असली सिकंदर?
Box Office Clash: 'बंटवारा' के भारी बजट पर भारी पड़ेगी 'आवारापन 2' की दीवानगी?
इस सप्ताह बॉलीवुड का बॉक्स ऑफिस दो बिल्कुल अलग मिजाज वाली फिल्मों का अखाड़ा बनने जा रहा है। एक तरफ हैं अपने ढाई किलो के हाथ और गदर मचाने वाले एक्शन के लिए मशहूर सनी देओल, जिनकी महात्वाकांक्षी फिल्म 'बंटवारा 1947' रिलीज हो रही है। तो दूसरी तरफ हैं सीरियल किसर और रोमांस के बेताज बादशाह रहे इमरान हाशमी, जो अपनी कल्ट क्लासिक फिल्म के सीक्वल 'आवारापन 2' के साथ पर्दे पर वापसी कर रहे हैं।
बॉलीवुड के साथ-साथ फैंस की भी सांसें अटकी हुई हैं। हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल है कि बॉक्स ऑफिस की इस जोरदार टक्कर में कौन सा हीरो ओपनिंग डे पर बाजी मारेगा और किसकी फिल्म लंबी रेस का घोड़ा साबित होगी? आइए, दोनों फिल्मों की खूबियों और खामियों का सटीक विश्लेषण करते हैं।
'बंटवारा 1947': बड़े बजट और पुरानी हिट जोड़ी का दांव
'बंटवारा 1947' कोई आम फिल्म नहीं है; इसे मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने प्रोड्यूस किया है। सबसे बड़ी यूएसपी है सनी देओल और डायरेक्टर राजकुमार संतोषी का बरसों बाद साथ आना। याद रहे, इस जोड़ी ने 'घायल', 'घातक' और 'दामिनी' जैसी ऐतिहासिक हिट फिल्में दी हैं। 'गदर 2', 'जाट' और 'बॉर्डर 2' के बज के कारण सनी देओल का मार्केट इस वक्त चरम पर है, जिससे ट्रेड पंडितों को इस फिल्म से छप्पर फाड़ कमाई की उम्मीद है।
खूबियां:
- सनी देओल का जबरदस्त स्टारडम और राजकुमार संतोषी का बेहतरीन डायरेक्शन।
- आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस का मजबूत बैकअप और फिल्म का तगड़ा प्रमोशन।
- बड़े पर्दे वाला लार्जर-देन-लाइफ कैनवास।
कमियां:
- सनी देओल के कोर फैंस उन्हें पाकिस्तान विरोधी हार्डकोर एक्शन अवतार में देखना चाहते हैं, लेकिन यह फिल्म उस तरह का वादा नहीं करती।
- सिनेमाघरों में सबसे ज्यादा जाने वाले 'युवा वर्ग' के लिए फिल्म में सीधा आकर्षण कम है।
- राजकुमार संतोषी का हालिया ट्रैक रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है और फिल्म का संगीत भी अब तक चार्टबस्टर नहीं बन पाया है।
नतीजा: बंपर प्रमोशन के बावजूद, फिल्म धीमी शुरुआत कर सकती है और माउथ पब्लिसिटी के दम पर ही आगे बढ़ पाएगी।
'आवारापन 2': डार्क हॉर्स साबित हो सकती है कल्ट सीक्वल
दूसरी ओर है 'आवारापन 2'। दिलचस्प बात यह है कि इसका पहला भाग सिनेमाघरों में फ्लॉप रहा था, लेकिन टीवी और इंटरनेट पर यह एक 'कल्ट क्लासिक' बन गई। बरसों बाद इसके दूसरे भाग का आना फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है। इमरान हाशमी लंबे समय से एक अदद सोलो हिट को तरस रहे हैं, और यह फिल्म उनके करियर के लिए संजीवनी बूटी बन सकती है।
खूबियां:
- फिल्म की 'ब्रांड वैल्यू' और पहले पार्ट की तगड़ी फैन फॉलोइंग।
- यूथ अपील: फिल्म का सब्जेक्ट, ट्रीटमेंट और दिशा पाटनी की मौजूदगी आज के युवाओं को सीधा कनेक्ट करती है।
- कम प्रमोशन के बावजूद फिल्म का ऑर्गेनिक बज बहुत ज्यादा है। मेकर्स को फिल्म की क्वालिटी पर पूरा भरोसा है।
कमियां:
- इमरान हाशमी ने लंबे समय से बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ी हिट नहीं दी है, जिससे ओपनिंग कलेक्शन पर असर पड़ सकता है।
- बड़े बजट की 'बंटवारा' के सामने स्क्रीन्स और शोज कम मिल सकते हैं।
नतीजा: बिना ज्यादा शोर-शराबे के, यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चौंकाने वाली ओपनिंग ले सकती है और क्लैश की 'डार्क हॉर्स' साबित हो सकती है।
किसका पलड़ा है भारी?
कुल मिलाकर, यह क्लैश बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। फिलहाल स्केल, बजट और प्रमोशन के मामले में 'बंटवारा 1947' थोड़ी आगे खड़ी नजर आ रही है। लेकिन, 'आवारापन 2' की अंडरकरंट यूथ अपील और कल्ट वैल्यू इसे बॉक्स ऑफिस का सरप्राइज पैकेज बना सकती है। अब देखना यह है कि दर्शक सनी देओल की गंभीरता को चुनते हैं या इमरान हाशमी के आवारापन को!

