लगातार 3 हिंदी फिल्में फ्लॉप, नहीं चला अक्षय-अमिताभ-कंगना का जादू

बेलबॉटम, चेहरे के बाद थलाइवी भी सिनेमाघरों में फ्लॉप हो गई। मल्टीप्लेक्स चेन से हुए विवाद के कारण थलाइवी मल्टीप्लेक्स में रिलीज नहीं हुई, लेकिन जितने भी सिनेमाघरों में इसे दिखाया गया दर्शक नहीं मिले। की इस फिल्म के पहले और की फिल्मों के साथ भी दर्शकों ने ऐसा ही सुलूक किया था।

अक्षय की 'बेलबॉटम' बड़े स्टार की सिनेमाघर में रिलीज होने वाली पहली फिल्म थी। धूम-धड़ाके के साथ इसे सिनेमाघरों ने इस उम्मीद के सहारे रिलीज किया कि अक्षय के नाम पर दर्शक टिकट खरीद लेंगे और सिनेमाघरों की खोई हुई रौनक लौट आएगी, लेकिन पहले शो से ही उम्मीद ध्वस्त हो गई।

को दर्शकों के टोटे पड़ गए और किसी तरह सिनेमाघरों में इस फिल्म ने पहला सप्ताह पूरा किया। जो शो चले उनमें नाममात्र के दर्शक थे जिनसे बिजली का खर्चा भी नहीं निकला।

बेलबॉटम से जले सिनेमाघरों को लगा कि अमिताभ और इमरान हाशमी की थ्रिलर 'चेहरे' मरहम का काम करेगी, लेकिन इस मूवी के हाल तो बेलबॉटम से भी बुरे रहे। फिर बारी आई थलाइवी की और ग्राफ और नीचे की ओर चला गया।

क्यों नहीं आ रहे हैं दर्शक?
यह सवाल सिनेमाघर के व्यवसाय से जुड़े लोगों की जुबां पर है। वे तमाम गाइडलाइंस का पालन कर रहे हैं। सुरक्षा की गारंटी दे रहे हैं, लेकिन दर्शक मानो सिनेमाघर लौटना ही नहीं चाहते। कोरोना से यदि वे डर रहे हैं तो रेस्तरां और बाजारों में क्यों भीड़ है? क्या इन फिल्मों में दर्शकों को खींचने का आकर्षण नहीं था? यह सवाल भी हवा में तैर रहे हैं। माना कि कोरोना है, लेकिन इन सभी फिल्मों का व्यवसाय उम्मीद से बहुत कम रहा है।

बातें तो ये भी हो रही है कि बॉलीवुड से लोगों का मोह भंग हो गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म का बोलबाला पहले की तुलना में बढ़ गया है। देश-विदेश की नई-पुरानी फिल्में और सीरिज उपलब्ध है तो भला कौन सिनेमाघर जाएगा। दो-चार सप्ताह में बड़े परदे पर दिखाई जाने वाली ये फिल्में आप मजे से ड्राइंग रूम में देख सकते हैं। इसलिए भी सिनेमाघर कराह रहे हैं।

हॉलीवुड फिल्मों को मिले दर्शक
पिछले एक महीने में कुछ हॉलीवुड फिल्में भी स्थानीय भाषाओं में डब कर रिलीज की गई। इन्हें भी ज्यादा दर्शक नहीं मिले हो, लेकिन हिंदी फिल्मों की तुलना में हॉलीवुड फिल्मों का व्यवसाय कई ज्यादा अच्‍छा रहा है। 'शांग ची एंड द लीजण्ड ऑफ टेन रिंग्स' अब तक लगभग 25 करोड़ का व्यवसाय सिनेमाघरों से कर चुकी है। इतना व्यवसाय तो बेलबॉटम, चेहरे और थलाइवी का जोड़ करने पर भी नहीं आता।

फिल्म व्यसाय की सिनेमाघरों में यह हालत देख तमाम बड़ी फिल्मों का प्रदर्शन अब अगले साल तक टल गया है। छोटी-मोटी फिल्में रिलीज होती रहेंगी, लेकिन इससे सिनेमाघरों का कोई भला होते नहीं दिखता। मल्टीप्लेक्स तो किसी तरह चल रहे हैं, लेकिन सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर चलाने वाले ऐसी हालत में नहीं है कि इतना घाटा सह सकें।



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