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भाजपा की इस चुनावी चाल से बिहार में फिर NDA सरकार, जानिए जीत के 5 कारण

Updated: बुधवार, 11 नवंबर 2020 (15:01 IST)
पटना। बिहार (Bihar) में सत्ता विरोधी लहर और विपक्ष की कड़ी चुनौती को पार करते हुए नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाले राजग ने बिहार में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया। इस जीत का पूरा श्रेय भाजपा के चुनावी मैनेजमेंट को ही जाता है। जानिए बिहार में राजग की जीत के 5 कारण...

एंटीइनकमबेंसी फेक्टर को भांपा : भाजपा और जदयू दोनों ने समय रहते बिहार की जनता के मूड को भांप लिया था। दोनों ही दलों ने इसी हिसाब से चुनावी रणनीति तैयार की। भाजपा अगर नीतीश को छोड़ देती तो भी जीत संभव नहीं थी और उनके साथ भी चुनाव लड़ने पर हार दिख रही थी। ऐसे में भाजपा ने नीतीश को साथ लिया लेकिन चिराग पासवान पर भी हमला नहीं बोला। नतीजतन चिराग की लोजपा ने अधिकांश भाजपा उम्मीदवारों का विरोध नहीं किया और उनकी जीत का रास्ता आसान हो गया। नीतीश के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी इसलिए उनकी सीटें कम आई।

भाजपा ने नहीं किया नीतीश के चेहरे का इस्तेमाल : भाजपा को जैसे ही नीतीश कुमार से जनता की नाराजगी का अहसास हुआ उसने चुनाव में नीतीश के चेहरे से दूरी बनाई। इससे उन्होंने अपने मतदाताओं को बनाए रखने में मदद मिली। उधर नीतीश को वोटरों के गुस्से का सामना करना पड़ा और उसे 28 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। चुनाव में भाजपा को 21, वीआईपी को 4 और हम को 3 सीट का लाभ हुआ और इस नुकसान की भरपाई हो गई।

पीएम मोदी का चेहरा : बिहार में राजग के बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय पीएम मोदी को दिया जा रहा है। महागठबंधन के पास नरेंद्र मोदी के कद का कोई नेता नहीं था और उन्होंने इसका भरपूर फायदा भी उठाया। उन्होंने न सिर्फ तेजस्वी यादव पर बड़े हमले किए बल्कि लालू प्रसाद यादव के राज की खामियों और नीतीश कुमार के शासन की खूबियों को भी लोगों तक पहुंचाया। लोगों को उनकी 'जंगलराज के युवराज' वाली बात समझ में आ गई और बिहार में नीतीश राज का रास्ता साफ हो गया।

इमोशनल कार्ड : तीसरे चरण के मतदान से पहले नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार द्वारा खेला गया इमोशनल कार्ड भी काम कर गया। नीतीश ने एक और इसे अपना आखिरी चुनाव बताकर मतदाताओं को रिझाया तो पीएम मोदी के द्वारा जनता को लिखी गई चिट्ठी ने भी अपना काम कर दिखाया।

महिला मतदाता : भाजपा-जदयू की जीत में महिलाओं का बड़ा योगदान रहा। पहले चरण के मुकाबले दूसरे और तीसरे चरण में महिला मतदाताओं की बंपर वोटिंग ने ही राजग को सत्ता के गलियारे तक पहुंचाया। तेजस्वी के '10 लाख नौकरियों' वाले दांव पर नीतीश की 'सुरक्षा' भारी पड़ी।
लेखक के बारे में
नृपेंद्र गुप्ता
नृपेंद्र गुप्ता पिछले 21 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रिंट एवं डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य का अनुभव। वर्तमान में वेबदुनिया की न्यूज टीम में सहायक संपादक के रूप में कार्यरत हैं।   अनुभव : नृपेंद्र गुप्ता 2 दशक से ज्यादा समय से प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में कार्य.... और पढ़ें

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