सऊदी अरब ने 'कफ़ाला' सिस्टम में किया बदलाव, मज़दूर अब बदल सकेंगे नौकरी

BBC Hindi| पुनः संशोधित गुरुवार, 5 नवंबर 2020 (11:43 IST)
सऊदी अरब ने घोषणा की है कि वो 'कफ़ाला' सिस्टम के तहत लगाई जाने वाली कुछ पाबंदियों को हटाएगा, जिससे मज़दूरों के जीवन पर नौकरी देने वाले व्यक्ति या कंपनी का नियंत्रण कम हो जाएगा। 'कफ़ाला' सिस्टम में बदलाव का असर क़रीब एक करोड़ विदेशी मज़दूरों के जीवन पर पड़ सकता है।

इन सुधारों के बाद अब निजी सेक्टर में काम कर रहे मज़दूर अपने मालिक की मर्ज़ी के बिना नौकरी बदल सकते हैं और देश छोड़कर जा सकते हैं। सऊदी सरकार का कहना है कि उसकी कोशिश है कि मज़दूरों की क्षमता बढ़ाई जाए और काम के माहौल को और बेहतर बनाया जाए। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना था कि मौजूदा 'कफ़ाला' सिस्टम के कारण मज़दूरों का शोषण और उनका उत्पीड़न होने की संभावना अधिक है।

मार्च से लागू होंगे बदलाव
सऊदी अरब के मानव संसाधन मंत्रालय ने कहा है कि बुधवार को श्रम क़ानून में जो नए बदलाव लाए गए हैं, वो उन सभी पर लागू होंगे, जो निजी सेक्टर में काम करते हैं। ये बदलाव मार्च के महीने से लागू होंगे। में बदलाव के बाद अब सऊदी अरब में काम करने वाले विदेशी मज़दूरों को नौकरी छोड़ने के लिए या फिर बदलने के लिए अपने एम्प्लॉयर की इजाज़त की ज़रूरत नहीं होगी।

साथ ही उन्हें बिना अपने एम्प्लॉयर की अनुमति देश के बाहर जाने की इजाज़त होगी। मज़दूर सीधे तौर पर सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। उनके एम्प्लॉयर्स के साथ उनका जो भी सर्विस कॉन्ट्रैक्ट होगा, उसे ऑनलाइन रखा जाएगा।

सऊदी अरब के मानव संसाधन मंत्रालय के उपमंत्री अब्दुल्लाह बिन नसीर अबुथुनायन ने कहा, हम देश में एक बेहतर श्रम बाज़ार बनाना चाहते हैं और साथ ही मज़दूरों के लिए काम के माहौल को भी बेहतर बनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रम क़ानूनों में इन बदलावों से विज़न 2030 के उद्देश्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। विज़न 2030 के तहत सऊदी अरब तेल पर अपनी निर्भरता कम कर दूसरे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहता है।

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच में वरिष्ठ शोधकर्ता रोथाना बेग़म ने बीबीसी को बताया कि सरकार का ये ऐलान बेहद महत्वपूर्ण है और इससे विदेश से आने वाले मज़दूरों की दशा में बहुत बदलाव आएंगे। हालांकि वो कहती हैं, कफ़ाला सिस्टम अब भी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है।

शोषण
रोथाना बेग़म कहती हैं कि ऐसा लगता है कि मज़दूरों को अब भी काम की तलाश में सऊदी अरब आने के लिए स्पॉन्सर की ज़रूरत पड़ेगी। साथ ही किसी भी समय मज़दूरों के रेजिडेंसी परमिट रद्द करने या परमिट को जारी रखने का फ़ैसला उन्हें नौकरी देने वाले कर सकेंगे।

वो कहती हैं, इसका मतलब ये है कि मज़दूरों का शोषण होना जारी रहेगा और उनके एम्प्लॉयर्स का ही उन पर नियंत्रण रहेगा। वो कहती हैं ये बदलाव विदेशों से घरों में काम करने के लिए आने वाले मज़दूरों पर लागू नहीं होंगे, जिनके शोषण की संभावना सबसे अधिक है।

वो कहती हैं कि ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी रिपोर्ट में इसका ज़िक्र किया है कि किस तरह एम्प्लॉयर्स अपने घरेलू नौकरों को आराम करने का समय दिए बग़ैर घंटों तक उनसे लगातार काम करवाते हैं, उन्हें समय पर वेतन नहीं देते और उन्हें घर से बाहर निकलने नहीं देते।

रिपोर्ट के अनुसार कुछ नौकरों का शारीरिक और यौन शोषण भी किया गया है। वो कहती हैं, सऊदी अरब में ऐसे लाखों मज़दूर हैं, जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं रखी गई है। अधिकारियों ने ये भी नहीं बताया है कि इस तरह के मज़दूरों को इसका लाभ मिलेगा या नहीं।


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