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केंद्र शासित प्रदेश कितने अलग होते हैं राज्यों से

मंगलवार, 6 अगस्त 2019 (16:28 IST)
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल सोमवार को राज्यसभा में पेश किया। इस बिल के अनुसार जम्मू-कश्मीर जो कि अभी तक भारतीय संघ के एक विशेष राज्य का दर्जा रखता है उसे अब दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा और उन्हें केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाएगा। एक प्रदेश जम्मू-कश्मीर होगा और दूसरा हिस्सा लद्दाख होगा। आइए जानते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश आखिर होता क्या है?
 
केंद्र शासित प्रदेश या संघ-राज्यक्षेत्र या संघक्षेत्र भारत के संघीय प्रशासनिक ढांचे की एक इकाई है। इस समय भारत में सात केंद्र शासित प्रदेश हैं।
 
अंडमान-निकोबार
दिल्ली
पांडिचेरी या पुड्डुचेरी
चंडीगढ़
दादर व नगर हवेली
दमन व दीव
लक्षद्वीप
जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन बिल जैसे ही क़ानून का रूप लेगा भारत में केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो जाएगी। केंद्र शासित प्रदेश के गठन के कई कारण हो सकते हैं।
 
प्रशासनिक ढांचा
भारत के राज्यों की अपनी चुनी हुई सरकारें होती हैं, लेकिन केंद्र शासित प्रदेशों में सीधे-सीधे भारत सरकार का शासन होता है। भारत के राष्ट्रपति हर केंद्र शासित प्रदेश का एक 'सरकारी प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर)' या 'उप-राज्यपाल (लेफ़्टिनेंट गवर्नर)' नामित करते हैं। केंद्रशासित प्रदेशों का शासन राष्ट्रपति इन्हीं प्रशासक या उप-राज्यपाल के ज़रिए करते हैं।
 
भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति कोई भी काम केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही करते हैं, इसलिए इसका सीधा अर्थ यही हुआ कि केंद्र शासित प्रदेश पर केंद्र सरकार का ही शासन चलता है। केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभा और मंत्रिपरिषद हो भी सकते हैं और नहीं भी।
 
अंडमान-निकोबार, दिल्ली और पांडिचेरी के प्रशासकों को उप-राज्यपाल कहा जाता है जबकि चंडीगढ़, दादर और नगर हवेली और दमन एवं दीव में शासन करने वाले अधिकारी को एडमिनिस्ट्रेटर या प्रशासक कहा जाता है। दादर और नगर हवेली तथा दमन एंव दीव का काम-काज एक ही प्रशासक देखते हैं।
 
दिल्ली और पांडिचेरी की अपनी-अपनी विधानसभाएं और मंत्रिपरिषद हैं। लेकिन इन दोनों के अधिकार बहुत सीमित होते हैं और कुछ ही मामले में इनको अधिकार होते हैं। इन विधानसभाओं के ज़रिए पारित बिल को भी राष्ट्रपति से मंज़ूरी लेनी पड़ती है। और कुछ खास कानून बनाने के लिए तो इन्हें केंद्र सरकार से अग्रिम स्वीकृति लेनी पड़ती है।
 
कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण इन इलाकों को किसी राज्य का हिस्सा नहीं बनाकर सीधे केंद्र सरकार के अधीन रखा जाता है।
 
भौगोलिक कारण
 
ये कानूनी तौर पर तो भारत का हिस्सा होते हैं लेकिन मेनलैंड भारत से बहुत दूर होते हैं। इसलिए किसी पड़ोसी राज्य का हिस्सा नहीं बन सकते। और जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से इतने छोटे होते हैं कि उन्हें अलग राज्य का दर्जा देना मुश्किल होता है। इसलिए उन्हें केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाता है। अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप इसके उदाहरण हैं।
 
सांस्कृतिक कारण
सांस्कृतिक कारणों से भी केंद्र शासित प्रदेशों का गठन किया जाता है। कई बार किसी जगह की खास सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए उन्हें केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाता है। दमन व दीव, दादर व नागर हवेली और पुड्डुचेरी इसकी मिसाले हैं।
 
दरअसल यहाँ लंबे समय तक यूरोपीय देशों पुर्तगाल (दमन व दीव, दादर व नागर हवेली) और फ्रांस(पुड्डुचेरी) का राज रहा था इसलिए यहाँ की संस्कृति उनसे मेल खाती है और इसलिए इनकी सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने के लिए इन्हें किसी राज्य के साथ ना मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया।
 
पुड्डुचेरी की एक और ख़ास बात ये है कि इसके चार ज़िले अलग-अलग राज्यों से मिलते हैं। महे केरल के पास, यनम आंध्र प्रदेश के पास और पुड्डुचेरी व कराईकल तमिलनाडु के पास स्थित है। ऐसे में सबसे बेहतर यही था कि उन्हें एक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर रखा जाए।
 
राजनीतिक व प्रशासनिक कारण
राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से भी केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाता है। दिल्ली और चंडीगढ़ इसकी मिसाले हैं।
 
भारत में नई दिल्ली को किसी राज्य से अलग उसी प्रकार रखा गया है जैसे संयुक्त राज्य अमरीका में राजधानी वाशिंगटन डीसी को रखा गया है। 1956 से 1991 तक नई दिल्ली भी केंद्रशासित प्रदेश ही था लेकिन 1991 में 69वें संविधान संशोधन से राष्ट्रीय राजधानी प्रदेश (NCT) का दर्जा प्राप्त हुआ है और इसे भी पुड्डुचेरी की तरह स्वयं के मंत्रिमंडल व मुख्यमंत्री की व्यवस्था मिली है। यहां भी उपराज्यपाल की नियुक्ति होती है जो केंद्र सरकार करती है और उपराज्यपाल व मंत्रिमंडल के सामंजस्य से यह प्रदेश चलता है।
 
चंडीगढ़ 1966 तक पंजाब की राजधानी था, लेकिन 1966 में हरियाणा के गठन के बाद दोनों राज्य चंडीगढ़ को अपनी राजधानी बनाना चाहते थे और कोई पीछे हटने को तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में चंडीगढ़ को केंद्रशासित प्रदेश बनाकर दोनों राज्यों की राजधानी बना दिया गया।       

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