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आयुर्वेद में बताए हैं आम खाने के यह 5 'खास' फायदे, क्या आप जानते हैं?

सोमवार,अप्रैल 15, 2019
mango benefit
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हर छोटी-बड़ी समस्या के इलाज में गिलोय बेहद फायदेमंद दवा है। गिलोय या गुडुची, जिसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कोर्डीफोलिया है, का आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान है।
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श्वास नलियों में सूजन से चिपचिपा बलगम इकट्ठा होने, नलियों की पेशियों के सख्त हो जाने के कारण मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है। इसे ही अस्थमा कहते हैं।
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सिर्फ एक दवा का प्रयोग कर आप 80 प्रकार के वात रोगों से बच सकते हैं। जी हां, इस दवा का सेवन करने से आप कठिन से कठिन बीमारियों से पूरी तरह से निजात पा सकते हैं।
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शरद पूनम की रात हजार काम छोड़कर 15 मिनट चन्द्रमा को एकटक निहारना सेहत के लिए शुभ होता है। जानिए, और भी आश्चर्यजनक लाभ...
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आर्थराइटिस खास तौर से जोड़ों में होने वाली वह समस्या है, जो दर्द के लिए जिम्मेदार होती है।आयुर्वेद के अनुसार जोड़ों में दर्द इसलिए होता है, क्योंकि जोड़ों में टॉक्सिन यानी जहरीले पदार्थ जमा हो जाते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक ऑर्थराइटिस के उपचार में सबसे ...
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आयुर्वेद में हेमपुष्प या ताम्र पल्लव कहा जाने वाला अशोक का पेड़, सेहत की समस्याओं का समाधान करने में मददगार है। इसके पत्ते, छाल, फूल, बीज और यहां तक कि जड़ें भी दवा के रूप में प्रयोग की जाती हैं। जानिए इसके यह 5 फायदे -
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अनियंत्रित एवं अनियमित खानपान के चलते कई शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं पैदा होती हैं, जिनमें हृदय रोग भी शामिल है।
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अब 5 रुपए में डायबिटीज की दवा...

सोमवार,अक्टूबर 26, 2015
डायबिटीज के रोगियों के लिए एक अच्‍छी खबर है। वैज्ञानिक रूप से स्‍वीकृत 5 रुपए की गोली से टाइप टू डायबिटीज के रोगियों को लाभ देगी। लखनऊ की काउंसिल ऑफ सां‍इटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) लैब ने इस हर्बल दवा को लॉन्‍च किया है। इसका नाम बीजीआर-34 ...
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आर्टी चोक में 60 से 85 प्रतिशत रोगी आयुर्वेद के उपचार तथा खानपान को नियंत्रित कर बिना किसी शल्यक्रिया के आजीवन स्वास्थ्य रह सकते हैं।
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गिलोय के गुणों की संख्या काफी बड़ी है। इसमें सूजन कम करने, शुगर को नियंत्रित करने, गठिया रोग से लड़ने के अलावा शरीर शोधन के भी गुण होते हैं। गिलोय के इस्तेमाल से सांस संबंधी रोग जैसे दमा और खांसी में फायदा होता है। इसे नीम और आंवला के साथ मिलाकर ...
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आज विश्व की आबादी के 90 प्रतिशत व्यक्ति हृदय रोग से पीड़ित है जो अनियमित भोजन, अनियमित दिनचर्या के साथ फास्ट फूड अत्यधिक प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से एसिडिटी, गैस, उच्च रक्तचाप, मोटापा तथा मधुमेह जैसे रोग के साथ हृदय रोग ...
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आयुर्वेद से काबू करें अस्थमा

मंगलवार,सितम्बर 6, 2011
अस्थमा और एलर्जी पीड़ितों के लिए यह माह थोड़ा खतरनाक होता है। क्योंकि बारिश के बाद सितंबर में धूल उड़ती है। बारिश के कीटाणुओं को फैलने-पनपने का मौका मिल जाता है। यूं भी वातावरणीय कारकों के कारण बढ़ रही एलर्जी के कारण अस्थमा के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ...
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भारतीय पौराणिक दृष्टि से धनतेरस को स्वास्थ्य के देवता का दिवस माना जाता है। भगवान धन्वंतरि आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के आराध्य देवता हैं। भगवान धन्वंतरि से आज के दिन प्रार्थना की जाती है कि वे समस्त जगत को निरोग कर मानव समाज को दीर्घायुष्य प्रदान ...
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भारत में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) का चरम विकास आज से लगभग 5 हजार वर्ष पुर्व सुश्रुत काल में मिलता है। काशी के राजा दिवोदास जिन्हें धन्वन्तरी भी कहते हैं -शल्यक्रिया के सफल चिकित्सक थे। वर्तमान काल में उनके अनुयायी योगरत्नाकर ने सुश्रुत के आधार पर लिखा ...
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आयुर्वेद हमेशा आगे रहेगा

गुरुवार,अक्टूबर 29, 2009
भारत में आयुर्वेद की प्राचीन यशस्वी परंपरा रही हैं। भारत की कई बड़ी कंपनियाँ इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहीं हैं। इस श्रृंखला में वैद्यनाथ और डाबर दो प्रमुख नाम हैं। धन्वंतरि जयंती पर आयुर्वेद की महत्ता प्रतिपादित करते हुए प्रस्तुत है इन कंपनियों की ...
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अशोक एवं अशोकारिष्ट

मंगलवार,जुलाई 14, 2009
असली अशोक के वृक्ष को लैटिन भाषा में 'जोनेसिया अशोका' कहते हैं। यह आम के पेड़ जैसा छायादार वृक्ष होता है। इसके पत्ते 8-9 इंच लम्बे और दो-ढाई इंच चौड़े होते हैं। इसके पत्ते शुरू में तांबे जैसे रंग के होते हैं, इसीलिए इसे 'ताम्रपल्लव' भी कहते हैं।
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सिर दर्द व नारी रोगों से पीड़ित महिलाएँ दोनों वक्त भोजन के बाद आधा कप पानी में टॉनिक एफ-22 या सुंदरी संजीवनी डालकर पिएँ। सुबह-शाम दूध के साथ दो गोली अशोल टेबलेट लें। यह प्रयोग 3-4 माह तक नियमित करना चाहिए।
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ग्रीष्म ऋतु में दाडिमावलेह का सेवन हर व्यक्ति के लिए अमृततुल्य है अर्थात दाडिमावलेह में रोगशमन की विशिष्ट ताकत है। दाडिम शरीर की गर्मी व खून की कमी दूर करने में लाभकारी होता है। दाडिमावलेह में दाडिम रस के साथ जायफल, जावित्री, तेजपान, दालचीनी आदि ...
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दुबलापन : कारण व उपचार

मंगलवार,मई 12, 2009
आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत मोटे तथा अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को निंदित व्यक्तियों की श्रेणी में माना गया है। वस्तुतः कृशता या दुबलापन एक रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयम का परिणाम मात्र है।
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