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Written By WD Feature Desk
Last Updated : सोमवार, 2 मार्च 2026 (18:04 IST)

क्या भारत को भी युद्ध में धकेलेगा खग्रास चंद्र ग्रहण, क्या कहते हैं ग्रह गोचर

narendra modi
lunar eclipse and war: सूर्य और चंद्र ग्रहण के दौरान अक्सर भूकंप, आगजनी और विस्फोट की घटनाएं देखी गई है। वर्तमान में 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण और फिर 03 मार्च चंद्र ग्रहण के बीच में दुनिया महायुद्ध के मुहाने पर पहुंच गई है। इसी बीच मंगल ने कुंभ में गोचर करके राहु के साथ युति करके अंगारक योग बनाया है जो कि 02 अप्रैल तक रहेगा। इसी बीच 19 मार्च को रौद्र नाम का संवत्सर प्रारंभ होगा जो देश और दुनिया में तबाही को तेज कर देगा। 
 
चंद्र ग्रहण का इतिहास देखें तो 2020 में कुल 6 ग्रहण योग अर्थात 2 सूर्य ग्रहण और 4 चंद्र ग्रहण ने देश और दुनिया में जो कोहराम मचाय था उसे सभी ने देखा था। महामारी और लॉकडाउन के दौरान जो हुआ वह किसी से छुपा नहीं है। अब अगला 5+1 ग्रहणों वाला वर्ष 2029 में रहेगा जिसमें 4 सूर्य और 2 चंद्र ग्रहण रहेंगे। 
 

युद्ध और ग्रहण: 

1. मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) के अनुसार ग्रहण के प्रभाव 40 दिनों के पहले और ग्रहण के बाद 40 दिनों के अंदर होता है। ज्योतिष के अनुसार, जब दो ग्रहणों के बीच 14 दिनों का अंतर होता है, तो यह देश और दुनिया में बड़े भूकंपों और राजनीतिक उथल-पुथल का कारण बनता है। 2025 में यह संयोग कई बार बना, जिसका असर स्पष्ट रूप से देखा गया। इसके बाद वर्ष 2026 में भी यह संयोग बना है।
 
2. पौराणिक कथाओं और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध से ठीक पहले एक ही महीने में दो ग्रहण (सूर्य और चंद्र) पड़े थे और युद्ध के दौरान एक सूर्य ग्रण था। प्राचीन और मध्यकालीन युद्धों के दौरान चंद्र या सूर्य ग्रहण की घटना देखी गई है। 
Pictured is a map of India with an eclipse, planets, and zodiac signs, with a war in the background.

3. भारत पाकिस्तान युद्ध: 

- 1965 के युद्ध के ठीक पहले और दौरान ग्रहणों की एक श्रृंखला थी। 
- 1971 के युद्ध छिड़ने के ठीक बाद 6 अगस्त 1971 को आंशिक चंद्र ग्रहण और 20-21 अगस्त 1971 को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस समय युद्ध अपने चरम पर था, उसी महीने 31 दिसंबर 1971 को आंशिक चंद्र ग्रहण लगा था।
- 3 मई 1999 अर्थात कारगिल युद्ध के समापन के ठीक बाद एक बहुत प्रभावशाली ग्रहण लगा था। 
 
- हाल ही में जब भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) हुआ तब उसके ठीक पहले 14 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण और 29 मार्च को आंशिक सूर्य ग्रहण था। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ और फिर 6-7 मई 2025 की रात को शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर। इसके बाद 7 सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण 21 सितंबर 2025 को आंशिक सूर्य ग्रहण था। 7 सितंबर के चंद्र ग्रहण के बाद नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ बड़ा जन विद्रोह हुआ।
 
- उपरोक्त ग्रहण के इतिहास और युद्ध को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि क्या पाकिस्तान के द्वारा किसी उकसावे की कार्रवाई की जाएगी जिसके चलते भारत अपना 'ऑपरेशन सिंदू 02' लॉन्च कर देगा। यदि ऐसा होगा तो क्या भारत भी एक महायुद्ध का हिस्सा बन जाएगा क्योंकि वर्तमान में इजराइल और ईरान का युद्ध चल रहा है जो तीसरे युद्ध की आहट पैदा कर रहा है। 
 

2026 के ग्रहणों की सूची:

17 फरवरी 2026– सूर्य ग्रहण
03 मार्च 2026– चंद्र ग्रहण
12 अगस्त 2026 – सूर्य ग्रहण
28 अगस्त 2026 – चंद्र ग्रहण
 

4. ग्रहण के साथ इसमें ग्रहों के योग भी युद्ध के लिए जिम्मेदार:

शनि मीन योग: 29 मार्च 2025 को शनि का मीन राशि में गोचर हुआ और वह वक्री चाल चला। यह योग 2028 तक रहेगा।
अतिचारी बृहस्पति: 14 मई 2025 को गुरु ग्रह वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में अतिचारी हो गए, जिसे दो देशों के बीच युद्ध और जलवायु परिवर्तन का कारक माना जाता है। गुरु 8 वर्षों तक अतिचारी चाल चलेंगे।
राहु गोचर: 18 मई 2025 को राहु ने मीन से निकलकर कुंभ में और केतु ने सिंह राशि में गोचर किया। राहु के इस गोचर को तकनीकी क्षेत्र में विस्तार से जोड़कर देखा जाता है। राहु 31 अक्टूबर 2026 इसी राशि में रहेगा।