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Guru Pushya Yoga 2026: 21 मई 2026 को बनेगा गुरु-पुष्य योग का शुभ संयोग, जानें क्यों हैं खास

Published: शुक्रवार, 15 मई 2026 (17:09 IST)
Guru Pushya Yoga significance: 21 मई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और शुभ होने जा रहा है। इस दिन 'गुरु-पुष्य योग' का महासंयोग बन रहा है। हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को 'नक्षत्रों का राजा' माना जाता है, और जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'गुरु-पुष्य योग' कहते हैं।ALSO READ: Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?

 

यहां जानिए क्यों यह दिन इतना खास है और इसमें क्या करना शुभ रहेगा:

 

1. गुरु-पुष्य योग क्यों है इतना प्रभावशाली?

शास्त्रों के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (गुरु) हैं और इसके स्वामी शनि देव हैं। चूंकि पुष्य नक्षत्र खुद में शुभ है और गुरुवार भी भगवान विष्णु व गुरु बृहस्पति का दिन है, इसलिए इन दोनों का मिलन एक 'अक्षय' फल देने वाला योग बनाता है। यदि आप कोई बड़ी खरीदारी टाल रहे थे या घर-गाड़ी लेने का मन बना रहे थे, तो 21 मई 2026 का दिन कैलेंडर में मार्क कर लें। यह दिन आपकी आर्थिक उन्नति के द्वार खोल सकता है।
 

2. 21 मई 2026 का विशेष संयोग

गुरु-पुष्य योग: 21 मई 2026
गुरु पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ- 21 मई 2026 को 04:12 ए एम से
पुष्य नक्षत्र का अंत: 22 मई 2026 को 02:49 ए एम पर।
 
तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी।
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।
विशेषता: इस दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में होंगे, जो पुष्य नक्षत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।
 
अमृत सिद्धि योग: कई बार इस दिन गुरु-पुष्य के साथ अमृत सिद्धि योग भी बनता है, जो इसे किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए 'अबूझ मुहूर्त' अर्थात् बिना पंचांग देखे किया जाने वाला कार्य बना देता है।
 

3. इस दिन क्या करना होता है शुभ?

स्वर्ण (Gold) की खरीदारी: गुरु-पुष्य योग में सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहता है और समृद्धि लाता है।
 
निवेश (Investment): प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या नए व्यापार में निवेश के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।
 
धार्मिक कार्य: इस दिन गुरु मंत्र का जाप, दीक्षा लेना या तीर्थ यात्रा पर जाना आत्मिक शांति प्रदान करता है।
 
बहीखाता की शुरुआत: व्यापारी वर्ग इस दिन नए खाते या नई दुकान की शुरुआत करना पसंद करते हैं।ALSO READ: Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास की महिमा (पुरुषोत्तम मास महात्म्य), जानें मुख्य 6 बिंदु

 

4. इन कार्यों से मिलेगा महालाभ

विष्णु लक्ष्मी पूजन: इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से दरिद्रता दूर होती है।
 
श्री यंत्र की स्थापना: अपने घर या ऑफिस में 'श्री यंत्र' स्थापित करने के लिए यह सबसे सिद्ध मुहूर्त है।
 
पीली वस्तुओं का दान: चने की दाल, गुड़, पीले वस्त्र या हल्दी का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।
 

5. क्या न करें?

माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला था, इसलिए इस अत्यंत शुभ योग में भी 'विवाह' (Marriage) की रस्में नहीं की जाती हैं। खरीदारी और निवेश के लिए यह उत्तम है, लेकिन विवाह संस्कार के लिए अन्य मुहूर्तों को प्राथमिकता दी जाती है।
 
टिप: इस दिन शाम को उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में घी का दीपक जलाना सौभाग्य वर्धक माना जाता है।
 
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