1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. वट सावित्री व्रत
  4. Vat Savitri Vrat: A great fast for married women, learn 10 things

वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए महाव्रत, जानें पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी और जरूरी बातें vat savitri vrat 2026

Women worshipping the banyan tree on the occasion of Vat Savitri fast, pictured holding a puja plate and wrapping a cotton thread around the banyan tree
vat savitri vrat ki 10 baaten: ज्येष्ठ का महीना हिंदू धर्म में व्रतों और त्योहारों का संगम लेकर आता है। इन्हीं में से एक सबसे खास पर्व है 'वट सावित्री व्रत'। यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पत्नी के अपने पति के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा को रखा जाता है और ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में वट सावित्री अमावस्या 16 मई, दिन शनिवार को मनाई जाएगी।ALSO READ: Jyeshtha Amavasya Vrat 2026: ज्येष्ठ अमावस्या व्रत और पूजा विधि
 

अगर आप भी इस साल यह व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजन की थाली सजाने से पहले इन 10 खास बातों को जरूर जान लें:

 

1. त्रिदेवों का दिव्य आशीर्वाद

बरगद (वट) के पेड़ को पूजने के पीछे गहरा राज है। पुराणों के अनुसार, इसके मूल (जड़) में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसकी पूजा यानी त्रिदेवों का एक साथ पूजन!
 

2. एक व्रत, दो अलग तिथियां

क्या आप जानती हैं कि वट सावित्री साल में दो बार मनाया जाता है? उत्तर भारत में इसे ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है।
 

3. क्षेत्र के अनुसार बदलता उत्साह

जहां उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में अमावस्या वाली वट सावित्री की धूम रहती है, वहीं गुजरात और महाराष्ट्र की महिलाएं पूर्णिमा वाले व्रत को बड़ी श्रद्धा से रखती हैं।
 

4. अकाल मृत्यु को मात देने वाला व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके पति पर आने वाले हर संकट दूर हो जाते हैं और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है।
 

5. कैलेंडर का 'छोटा' सा फेर

भारत में दो मुख्य कैलेंडर चलते हैं- 'अमानता' और 'पूर्णिमानता'। दोनों में तिथियां वही रहती हैं, बस मनाने का तरीका और समय अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से बदल जाता है।
 

6. मन्नत का कच्चा धागा

महिलाएं बरगद के चारों ओर कच्चा सूत या रक्षासूत्र लपेटकर परिक्रमा करती हैं। माना जाता है कि वट वृक्ष में हर मन्नत को पूरा करने की असीम शक्ति होती है।
 

7. सावित्री-सत्यवान: प्रेम की अमर कहानी

इस व्रत का नाम माता सावित्री के नाम पर पड़ा, जिन्होंने यमराज के द्वार से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस खींच लाए थे। इस कथा को सुनने मात्र से महिलाओं को 'अखंड सौभाग्य' का आशीर्वाद मिलता है।
 

8. सुख-शांति और लक्ष्मी का वास

सिर्फ लंबी उम्र ही नहीं, बरगद की पूजा से घर में आर्थिक संपन्नता और मानसिक शांति भी आती है। यह पेड़ सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।
 

9. कौन रख सकता है यह व्रत?

यह इस व्रत की सबसे बड़ी खूबसूरती है। वट सावित्री का व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि शास्त्रानुसार कुमारी, विधवा, संतान की कामना रखने वाली स्त्रियां भी अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए रख सकती हैं।

 

10. भक्ति का सरल मार्ग

चाहे अमावस्या हो या पूर्णिमा, दोनों ही व्रतों की कथा और उद्देश्य एक समान हैं- अपने परिवार और जीवनसाथी की खुशहाली सुनिश्चित करना।
 
खास बात: वट सावित्री के दिन प्रकृति (पेड़) की पूजा हमें यह संदेश देती है कि हमारा जीवन प्रकृति से जुड़ा है, इसलिए इसका संरक्षण भी हमारा धर्म है।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ माह की अमावस्या का क्या है महत्व, जानिए पौराणिक कथा
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
ये भी पढ़ें
Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत पर पढ़ें ये महत्वपूर्ण पौराणिक कथा