1. धर्म-संसार
  2. व्रत-त्योहार
  3. वट सावित्री व्रत
  4. The banyan tree holds the secret of eternal good fortune; learn its religious and scientific significance
Last Updated : गुरुवार, 14 मई 2026 (11:57 IST)

Banyan tree worship: वट सावित्री व्रत: बरगद के पेड़ में छिपा है अखंड सौभाग्य का रहस्य, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

इमेज में अखंड सौभाग्य और लंबी उम्र का वरदान देने वाला वट वृक्ष तथा बरगद के पेड़ की पूजन करती सुहागिनें
Vat Savitri puja: बरगद का पेड़, जिसे वट वृक्ष भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि शक्ति, लंबी आयु और स्थायित्व का प्रतीक है। भारतीय धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि बरगद का पेड़ जीवन और समृद्धि का प्रतीक है।
 
वट सावित्री व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तथा ज्येष्ठ पूर्णिमा को यह व्रत मनाया जाता है और इसे वट व्रत या वट सावित्री व्रत भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस पूजा के पीछे का असली दर्शन क्या है?ALSO READ: Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?
 

त्रिदेवों की ऊर्जा का केंद्र है वट वृक्ष

शास्त्रों में वट वृक्ष को साक्षात ईश्वरीय रूप माना गया है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार:
 
जड़ में ब्रह्मा: सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी इसकी जड़ों में विराजते हैं।
 
मध्य में विष्णु: तने में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का वास है।
 
अग्रभाग में शिव: शाखाओं में संहारक और कल्याणकारी महादेव वास करते हैं।
 
यही कारण है कि जब महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करती हैं, तो वे एक साथ त्रिदेवों की दिव्य ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
 

अमरता और ज्ञान का प्रतीक

वट वृक्ष अपनी विशालता और लंबी आयु के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसे अमरत्व का प्रतीक माना गया है। दार्शनिक नजरिए से देखें तो यह ज्ञान और निर्माण का सूचक है। आपको बता दें कि भगवान बुद्ध को भी इसी वृक्ष की छाया में आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक 'लाइफ सपोर्ट सिस्टम' की तरह काम करता है, जो हवा को शुद्ध कर अनगिनत पक्षियों और जीवों को आश्रय देता है।
 

सिर्फ आस्था ही नहीं, आयुर्वेद का खजाना भी

बरगद का पेड़ औषधीय गुणों की खान है। आयुर्वेद में इसके हर हिस्से (छाल, पत्ते और फल) का विशेष महत्व बताया गया है:
 
यह शरीर की कांति (ग्लो) बढ़ाता है और पित्त-कफ जैसे विकारों को दूर करता है।
 
इसकी शीतल प्रकृति बुखार, मूर्च्छा और उल्टी जैसी समस्याओं में राहत देती है।
 
पर्यावरण को शुद्ध रखने में इसकी भूमिका सबसे अहम है।
 

वट सावित्री व्रत की खास परंपराएं

परिक्रमा का महत्व: पूजा के दौरान सूत लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करना अटूट प्रेम और धैर्य का प्रतीक है।
 
क्षेत्रीय विविधता: ज्येष्ठ अमावस्या को उत्तर भारत में और ज्येष्ठ पूर्णिमा को महाराष्ट्र व गुजरात में 'वट पूर्णिमा' के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।
 
दान का फल: इस दिन बांस के पंखे और चने-गुड़ का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और घर के क्लेश शांत होते हैं।
 
निष्कर्ष: वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करने और परिवार की खुशहाली के लिए संकल्प लेने का दिन है। सावित्री और सत्यवान की कथा हमें सिखाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी संकट को टाला जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें, हर महिला को जानना हैं जरूरी
लेखक के बारे में
वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम
पौराणिक कथा, इतिहास, धर्म और दर्शन के जानकार, अनुभवी ज्योतिष, लेखक और विषय-विशेषज्ञों द्वारा लिखे गए आलेखों का प्रकाशन किया जाता है।.... और पढ़ें
ये भी पढ़ें
वृषभ संक्रांति 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन से 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बड़ा फायदा