रिलायंस ने लगाई 6 ब्लॉक के लिए बोली

नेल्प के नौवें दौर में मिली 74 बोलियाँ

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित सोमवार, 28 मार्च 2011 (23:40 IST)
देश में तेल एवं गैस खोज के लिए शुरू की गई नई तेल खोज लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) के नौवें दौर में पेश 34 ब्लॉक के लिए सरकार को 74 बोलियाँ मिली हैं, लेकिन दुनिया की तेल एवं गैस क्षेत्र की प्रमुख कंपनियाँ इस बोली से दूर रहीं। रिलायंस ने छह ब्लॉक के लिए बोली लगाई।

केयर्न एनर्जी और वेदांता रिसोर्सिज सौदे की खींचतान के बीच नौवें दौर में बोली लगाने को विदेशी कंपनियाँ खुलकर सामने नहीं आईं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री एस. जयपॉल रेड्डी ने हालाँकि इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि नौवें दौर की पेशकश के लिए अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है और यह उम्मीद से बेहतर रही है, यह उत्साहवर्धक है।
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) जिसने पिछले नेल्प दौर में पेश दो तिहाई से अधिक ब्लॉक हासिल किए हैं ने इस बार भी 29 ब्लॉक के लिए बोली लगाई है। सार्वजनिक क्षेत्र की ही साथी कंपनी ऑइल इंडिया लिमिटेड ने दो क्षेत्रों के लिए बोली लगाई, जबकि ने छह ब्लॉक के लिए बोली लगाई।
प्राकृतिक गैस क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम गेल इंडिया और पेट्रोलियम पदार्थों की मार्केटिंग क्षेत्र की कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अपनी सहयोगी इकाई के जरिए चार ब्लॉक के लिए बोली लगाई है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस बार राजस्थान और गुजरात पर ध्यान केन्द्रित किया है। उसने बंगाल की खाड़ी स्थित अंडमान बेसिन में गहरे समुद्री क्षेत्र के दो ब्लॉक और राजस्थान और गुजरात में चार तटीय ब्लॉक के लिए बोली लगाई, लेकिन इसके विपरीत केयर्न इंडिया ने राजस्थान में पेश दो में से किसी भी ब्लॉक के लिए बोली नहीं लगाई। उसने दो अन्य क्षेत्रों के लिए बोली लगाई।
नेल्प नौ में भाग लेने वाले प्रमुख विदेशी नामों में ब्रिटेन का बीजी ग्रुप ही एकमात्र प्रमुख कंपनी रही। बीजी ने बीएचपी बिलिंटन के साथ मिलकर मुंबई बेसिन में गहरे समुद्री क्षेत्र स्थित ब्लॉक के लिए बोली लगाई है। एस्सार ऑयल ने खंबात बेसिन में जमीनी क्षेत्र स्थित ब्लॉक के लिए बोली लगाई।

जयपॉल रेड्डी ने हालाँकि संवाददाताओं के समक्ष इस बात से इनकार किया कि केयर्न वेदांता सौदे में खींचतान से विदेशी निवेशकों में गलत संदेश गया है। उन्होंने कहा कि हमने इस मामले में न तो कोई सकारात्मक रुख अपनाया है और न ही नकारात्मक नजरिया। हम इस मामले में निष्पक्षता बनाए हुए हैं।
रेड्डी ने कहा विदेशी कंपनियाँ सरकार की नीतियों के वजह से दूर नहीं रही हैं, इसमें नीतिगत मामला नहीं है कि हमने नेल्प नीति में पूरी तरह पारदर्शी नीतियाँ रखी हैं, विदेशी कंपनियों के साथ पूरी तरह न्यायोचित व्यवहार किया जा रहा है। विदेशी कंपनियों ने यदि बोली नहीं लगाई तो उसकी वजह बेहतर निवेश माहौल नहीं रहा है।

रेड्डी ने कहा कि चार महीने के भीतर कंपनियों के साथ ब्लॉक के लिए उत्पादन भागीदारी समझौते (पीएससी) पर हस्ताक्षर किए जाएँगे। सरकार ने 34 के लिए पेशकश की थी, 33 के लिए बोलियाँ मिलीं, इनमें से 14 क्षेत्र के लिए केवल एक बोली मिली। (भाषा)



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