वित्तीय संकट दूर करने के लिए प्रयास हों

नई दिल्ली (वार्ता)| वार्ता|
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के महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय के गंभीर और अनुमान से परे परिणाम होने की चेतावनी देते हुए इसके समाधान के लिए तत्काल ठोस सामूहिक प्रयास किए जाने का आह्वान किया।


बान ने 'भारत और संयुक्त राष्ट्रः एक अनिवार्य साझेदारी' विषय पर नौवीं राजीव गाँधी व्याख्यानमाला में अपने भाषण में कहा कि हमें संकट की तह में प्रणालीगत कमजोरियों का समाधान करने की जरूरत है।

उन्होंने दुनिया की सरकारों का आह्वान किया कि वे एक ऐसी संस्थागत प्रणाली विकसित करें जो बाजार और नियामक विफलताओं के खतरे को कम करने में मदद करे।

बान ने विकासशील और गरीब देशों पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट का असर पड़ने की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे विकास सहयोग पर खराब असर पडे़गा और निवेशक उभरते हुए बाजारों से अपना हाथ खींच सकते हैं।


उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति में कमी से विकसित देशों की वस्तुओं और सामान की माँग में कमी हो सकती है, जिससे बरोजगारी में वृद्धि होगी।उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष से पीछे हटने या टालने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

इस बारे में कहा जा सकता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने या ऊर्जा तथा अक्षय ऊर्जा में निवेश कैसे कर सकते हैं, इसका बेहतर प्रतिप्रश्न यह है कि क्या हम ऐसा नहीं करना वहन कर सकते हैं।
बान ने निरस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के लिए किए गए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के प्रयासों की सराहना करते कहा कि भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ताकत है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि आप लोकतंत्र, कानून के शासन और अच्छी सरकार के हिमायती के रूप में काम करना जारी रखें।



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