गुलाबी मन पर

फाल्गुनी

स्मृति आदित्य|
ND
मेरे नादान गुलाबी मन पर
तुम्हारे सच का धूसर रंग
इस कदर बिखर गया है कि
हमारा रिश्ता मटमैला हो गया

और आँखों के दहकते पलाश से
झूठे का
कच्चा रंग झर गया।



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