बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे कमलेश्वर

6 जनवरी : जयंती विशेष

कमलेश्वर : जयंती
भाषा|
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कितने पाकिस्तान’ के लेखक, नई कहानी आंदोलन के अगुआ कथाकार, कई पत्र पत्रिकाओं के सफल रहे को दूरदर्शन के पहले स्क्रिप्ट के तौर पर भी जाना जाता है। 1980 से 82 तक वह दूरदर्शन के अतिरिक्त महानिदेशक भी रहे। कमलेश्वर ने 1954 में ‘विहान’ पत्रिका का संपादन आरंभ किया और इसके बाद ‘नई कहानियाँ’, ‘सारिका’ कथायात्रा और गंगा पत्रिकाओं का सफल संपादन किया। वह हिन्दी समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ और ‘दैनिक भास्कर’ से भी जुड़े रहे।

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में छह जनवरी 1926 में जन्मे कमलेश्वर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. किया था। उन्होंने ‘आँधी’, ‘मौसम’, ‘रजनीगंधा’, ‘सारा आकाश’, ‘द बर्निंग ट्रेन’, ‘अमानुष’, ‘छोटी सी बात’, ‘मिस्टर नटवर लाल’, ‘सौतन’, ‘लैला’ और ‘राम बलराम’ की पटकथा लिखी थी।

कमलेश्वर के उपन्यास ‘काली आँधी’ पर गुलजार ने ‘आँधी’ फिल्म का निर्माण किया, जिसने अनेक पुरस्कार जीते। इसकेअलावा टीवी सीरियल ‘चंद्रकांता’, ‘दर्पण’ और ‘एक कहानी’ की पटकथा भी कमलेश्वर ने ही लिखी थी। उन्होंने कई वृत्तचित्रों और कार्यक्रमों का निर्देशन भी किया।
कमलेश्वर की पहली कहानी 1948 में प्रकाशित हुई थी और 1957 में ‘राजा निरबंसिया’ के प्रकाशन के साथ ही वह रातों रात बड़े कथाकार बन गए। उन्होंने तीन सौ से अधिक कहानियाँ लिखी हैं, जिनमें ‘मांस का दरिया’, ‘नीली झील’, ‘तलाश’, ‘बयान’, ‘नागमणि’, ‘अपना एकांत’, ‘जिंदा मुर्दे’, ‘कस्बे का आदमी’, ‘जार्ज पंचम की नाक’ और ‘स्मारक’ प्रमुख हैं।

कमलेश्वर ने करीब एक दर्जन उपन्यास भी लिखे, जिसमें ‘कितने पाकिस्तान’, ‘एक और चंद्रकांता’ ‘एक सड़क सत्तावन गलियाँ’, ‘डाक बंगला’, ‘तीसरा आदमी’, ‘लौटे हुए मुसाफिर’, ‘रेगिस्तान’ और ‘काली आँधी’ प्रमुख हैं।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी कमलेश्वर ने ‘अधूरी आवाज’, ‘रेत पर लिखे नाम’, ‘हिंदोस्ताँ हमारा’ नाटक संग्रह के अलावा चार बाल नाटक संग्रह भी लिखे हैं। आलोचना के क्षेत्र में उनकी ‘नई कहानी की भूमिका’ और ‘मेरा पन्ना : समानांतर सोच’ महत्वपूर्ण किताबें हैं।

उनके यात्रा विवरण ‘खंडित यात्राएँ’ और ‘कश्मीर : रात के बाद’ तथा संस्मरण ‘जो मैंने जिया’, ‘यादों के चिराग’ एवं ‘जलती हुई नदी’ शीर्षक से प्रकाशित हुए। 27 जनवरी 2007 को उनका निधन हो गया।

 

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