व्यायाम से रहें स्वस्थ

व्यायाम कब और कैसे

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व्यायाम का अर्थ है संपूर्ण शरीर या शरीर के किसी अंग विशेष को एक समान लय में कुछ निश्चित समय एवं निश्चित अनुपात में गति देना, माँसपेशियों, हड्डियों एवं रक्त परिवहन को सुषुप्तावस्था से जाग्रत करना, उत्तेजित करना, उनकी कार्यप्रणाली में गति प्रदान करना।

परंतु देखने में यह आता है कि किसी बीमारी के होने पर जब तक किसी डॉक्टर द्वारा विशिष्ट व्यायाम या सुबह तेज गति से पैदल घूमने जाने की हिदायत न दी जाए तब तक लोग इसे समय की बर्बादी ही मानते हैं। व्यायाम का महत्व दो-चार प्रतिशत व्यक्ति ही समझते हैं, परंतु वे भी नियमित नहीं कर पाते। सिर्फ एक प्रतिशत ही होंगे जो व्यायाम के प्रति नियमित हों।

  व्यायाम का अर्थ है संपूर्ण शरीर या शरीर के किसी अंग विशेष को एक समान लय में कुछ निश्चित समय एवं निश्चित अनुपात में गति देना, माँसपेशियों, हड्डियों एवं रक्त परिवहन को सुषुप्तावस्था से जाग्रत करना.....      
अधिकांशतः मन में प्रश्न यह उठता है कि मजदूर गरीब व्यक्ति पैदल या साइकिल से चलते हैं। इतना पसीना बहाते हैं फिर भी बीमार रहते हैं तो व्यायाम कैसे फायदेमंद है।

रोमसिन के शब्दों में स्वच्छता और श्रम मनुष्य के सर्वोत्तम वैद्य हैं। अज्ञानता, समयाभाव, स्वच्छता के प्रति जागृति की कमी, कुपोषण या अल्प पोषण के कारण ये बीमार होते हैं। शरीर एवं मांसपेशियाँ तो इनकी गठी हुई होती हैं। ये किसी शहरी बाबू की तुलना में कई गुना अधिक श्रम करने की शक्ति रखते हैं।

महिलाएँ सोचती हैं कि घर के कामों में ही उनका इतना व्यायाम हो जाता है, वे थक जाती हैं, उन्हें अलग से व्यायाम करने की जरूरत नहीं है। पुरुष भी यह सोचते हैं कि उनको दफ्तर या दुकान में काम की भागदौड़ में इतनी मेहनत करनी पड़ती है कि व्यायाम की जरूरत ही नहीं है। दोनों ही धारणाएँ गलत हैं।

एक जैसा कार्य करते-करते पूरे शरीर की मांसपेशियों का संचालन नहीं हो पाता, इसलिए उनकी मांसपेशियाँ गठी हुई नहीं होती और वे थक जाते हैं।

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डॉ. पद्मावती गुप्त
झाड़ू लगाना, पोंछा लगाना, कपड़े धोना भी अच्छे शारीरिक व्यायाम हैं। परंतु समस्त अंगों को सुडौल रखने के लिए तथा फेफड़ों में शुद्ध हवा के लिए अन्य व्यायाम भी आवश्यक हैं।



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