बेटे को पसंद नहीं था मेरा घर से जाना-सचिन
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तेंडुलकर ने कहा कि शुरू-शुरू में यह सब काफी कठिन था क्योंकि मेरे बेटे को मेरा घर से जाना पसंद नहीं आता था और जब मैं क्रिकेट दौरे पर जाता था तो पहले पाँच साल तो वह मुझसे टेलीफोन पर भी बात नहीं करता था लेकिन अब उसे पता है कि मैं क्या करता हूँ और मेरा खेल पसंद भी करता है।
यह पूछने पर कि क्या वे चाहते हैं कि उनका बेटा भी उनके नक्शेकदम पर चलते हुए एक क्रिकेटर बने, उन्होंने कहा कि मैं अजरुन पर किसी तरह का दबाव नहीं डालूँगा कि वह किस खेल से जुडे।
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सचिन ने कहा कि मैं सुनील गावस्कर को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूँ इसलिए शुरू में मैंने 35 शतक का लक्ष्य बनाया था। हम क्रिकेट जीवन में उनके उदाहरण अपनाते है, अगर आप महान क्रिकेटर बनना चाहते तो सबसे पहले आप को 34 शतक के रिकॉर्ड को पार करना होगा।
उन्होंने कहा कि सुनील गावस्कर और विवियन रिचर्ड्स दोनों मेरे हीरो रहे हैं और हमेशा से मैं खुद को इन दोनों का मिश्रण समझता हूँ। जब मुझे आक्रामक होना हो तो विवियन की तरह और जब एकाग्रता, मानसिक दृढ़ता, साहस और प्रतिबद्धता की जरूरत हो तो गावस्कर की तरह खेलना चाहता हूँ।
उन्होंने कहा कि हमारे अंदर नंबर एक बनने की क्षमता, भावना, इच्छा और भूख है और हम इस तरफ बढ़ भी रहे हैं। अगर आप पिछले कुछ वर्षों का टीम का प्रदर्शन देखें तो यह बहुत अच्छा रहा है। (भाषा)

