आदित्य L1 की सफल लांचिंग से कांग्रेस खुश, शेयर की मिशन की टाइमलाइन
congress on Aditya L1 launch : कांग्रेस ने शनिवार को आदित्य एल1 मिशन को देश के लिए शानदार उपलब्धि करार दिया। इसकी ऐतिहासिक परिष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि परियोजना को साल 2009 में इसरो की मंजूरी मिली थी।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'आज आदित्य एल 1 का प्रक्षेपण इसरो और भारत के लिए एक और शानदार उपलब्धि है। इसरो को एक बार फिर सलाम करते हुए, इसकी निरंतरता को समझने के लिए आदित्य एल1 की हाल की टाइमलाइन को याद करना सही होगा।'
उन्होंने कहा कि 2006 में 'एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज' के वैज्ञानिकों ने एक उपकरण के साथ सौर वेधशाला के कंसेप्ट का प्रस्ताव रखा। मार्च 2008 में वैज्ञानिकों ने इसरो के साथ इस प्रस्ताव को साझा किया।
दिसंबर 2009 में इसरो ने एक उपकरण के साथ आदित्य-1 परियोजना को मंजूरी दी। अप्रैल 2013 में पूर्व अध्यक्ष यूआर राव के हस्तक्षेप के बाद इसरो ने एक अवसर के बारे में घोषणा की, जिसमें वैज्ञानिक समुदाय से अधिक वैज्ञानिक उपकरणों (पेलोड) के प्रस्तावों की मांग की गई थी।आज आदित्य-L1 का लॉन्च होना ISRO और भारत के लिए एक और शानदार उपलब्धि है। ISRO को एक बार फिर सलाम करते हुए, इसकी निरंतरता को समझने के लिए आदित्य-L1 की हाल की टाइमलाइन को याद करना सही होगा।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 2, 2023
2006: एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी ऑफ़ इंडिया और इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने एक…
उन्होंने कहा कि जून 2013 में इसरो ने प्राप्त वैज्ञानिक प्रस्तावों की समीक्षा की। जुलाई 2013 में इसरो ने आदित्य-1 मिशन के लिए सात पेलोड का चयन किया। इस मिशन का अब नाम बदलकर आदित्य एल1 मिशन कर दिया गया है। नवंबर 2015 में इसरो ने औपचारिक रूप से आदित्य-एल 1 को मंजूरी दी।
उल्लेखनीय है कि सूर्य मिशन से संबंधित उपग्रह आदित्य एल1 को आज सुबह 11.50 बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया किया गया। इस उपग्रह को सूर्य परिमंडल के दूरस्थ अवलोकन और पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर एल1 पर सौर हवा का वास्तविक अवलोकन करने के लिए डिजाइन किया गया है। (भाषा)
Edited by : Nrapendra Gupta

